
Life Simply Unfolds (Hindi)
by Raman Mittal
Many of us feel restless trying to control how life unfolds and worrying about the results we hope for. In this talk, you are gently reminded to focus on your actions with sincerity and effort, while allowing life to move in its own way. What comes may not match your expectations, but with awareness and trust, you learn to receive it with greater ease and balance. हम में से कई लोग जीवन को नियंत्रित करने की कोशिश में उलझे रहते हैं—सब कुछ अपनी इच्छा के अनुसार हो, इसी चाह में भीतर एक बेचैनी बनी रहती है। इस वीडियो में आपको यह समझाया जाता है कि ध्यान परिणामों पर नहीं, अपने कर्मों पर रखें—पूरी निष्ठा और प्रयास के साथ। और जीवन को उसके अपने ढंग से घटित होने दें। जो मिलता है, वह हमेशा वैसा नहीं होता जैसा हमने सोचा था। लेकिन जब भीतर सजगता और भरोसा होता है, तो उसे स्वीकार करना आसान हो जाता है।
Transcript
या तो कुछ बहतर होता है या कुछ खराब एक्जैकली वो नहीं होता जो आप सोचते हैं आप सिर्फ करम कर सकते हो और फिर जीवन उसका फल देता है अक्सर वो नहीं होता जो हम सोचते हैं लेकिन जो होता है वो से बहतर होता है जो हम सोचते हैं नमस्ते जीवन घटता है जीवन को आप कंट्रोल में नहीं कर सकते हैं अगर यह नहीं होता है हम अक्सर जीवन में जो सोचते हैं जो उमीद रखते हैं जो कलपना करते हैं वैसा नहीं होता है अब यह सुनकर शायद आपको ऐसा लगे कि ऐसा तो नहीं है बहुत बार ऐस�� भी होता है कि जो आप सोचते हैं उससे बहतर results आते हैं या तो कुछ बहतर होता है या कुछ खराब exactly वो नहीं होता जो आप सोचते हैं और वैसे भी कुछ बहतर होना या कुछ खराब होना आपकी अपिक्षाओं के उपर निर्धारित करता है परिणाम results जो होते हैं वो होते हैं लेकिन हमारी अपिक्षाओं निर्धारित करती हैं कि वो हमें बहतर लगते हैं कि हमें खराब लगते हैं किसी के लिए 40% marks भी बहुत अच्छे होते हैं और किसी के लिए 90% भी कम क्या आपने महसूस किया है कि शाम को पार्टी है आप उसके लिए बहुत excited हो शाम को पार्टी में जाते हो लेकिन बोर हो जाते हो या फिर आपको लगता है कि इस बार तो आपकी promotion पक्की है दुनिया की कुई ताकत आपकी promotion नहीं रोख सकती लेकिन promotion नहीं मिलती या आपको लगता है इस बार तो आपकी काम की तारिफ आपके boss या आपकी wife आपके husband जरूर करेंगे लिकिन नहीं मिलती या हो सकता है उल्टा हो आपको लगता है जूते पढ़ने वाले हैं लिकिन आपको बहुत तारिफ मिलती है जीवन घटता रहता है अब क्या इसका मतलब ये है कि आपको कोई planning नहीं करनी आप कोई करम नहीं करोगे या फिर आप कोई उमीद ना रखो 90% के लिए try भी ना करो promotion के लिए मेहनत भी ना करो आप सिर्फ करम कर सकते हो और फिर जीवन उसका फल देता है अपने आप देता है और आप पाएंगे के अकसर long term में जीवन जो भी फल देता है वो अपके लिए अच्छा ही होता है कुछ साल पहले एक वर्क्षॉप के दोरान हमने एक सर्वे किया लाइव सर्वे उसमें जो जादातर पार्टिसिपेंस थे वो 35 से 45 साल की उमर के थे हमने पार्टिसिपेंस से पूचा कि दस साल पहले आपकी कुछ expectations होंगी कुछ अपेक्षाएं होंगी कुछ अकांक्षा� होंगी कुछ उमीद होंगी कि जीवन ऐसा होना चाहिए कि मेरे पास घर होगा मैं शेहर में रहूंगा मैं इस देश में रहूंगा मेरा इतना बड़ा परिवार होगा मैं यहां पे काम कर रहा हूंगा तो जो भी आपने सोचा और अब दस साल बाद क्योंकि वो दस साल बीट गए हैं तो क्या वैसा हुआ 82% 82% लोगों ने बोला कि जो उन्होंने सोचा था वैसा नहीं हुआ exactly वैसा नहीं हुआ अब हमने दूसर सवाल पूछा कि आप फिर से दस साल पहले जाए और आपने जो भी सोचा था कि आपकी जीवन की ऐसी quality होगी तो क्या आपकी expectations के हिसाब से आपकी जीवन की quality खराब है जैसी आपने सोची थी वैसी ही है जैसी आपने सोची थी या बहतर है इस पार 91% लोगों ने बोला कि उनकी जीवन की quality जैसी उन्होंने सोची थी उससे बहतर है इसके results बहुत powerful थे इसमें एक बहुत गेहरा सूत्र छुपा हुआ है अकसर वो नहीं होता जो हम सोचते हैं लेकिन जो होता है वो उससे बहतर होता है जो हम सोचते हैं जीवन घटता है जीवन भैता है जीवन को हम control नहीं कर सकते हैं लेकिन अमारे ज़्यादातर लोगों की जिनदेगी कोशिष जीवन को control control control करने में लगी रहती है और फिर जीवन हातों से फिसलता रहता है एक छोटी से exercise करते हैं कल शाम को याद कीजिए या कल दिन को याद कीजिए क्या आपका कल जो बीट गया कल की शाम कल का दिन वैसा ही गुज़रा जैसे आपने सूचा था अलग अलग घटनाएं जो आपने कुछ सोची होंगी सुबह के ऐसा दिन गुजरेगा क्या आप निश्चत रूप से कह सकते हैं कि आने वाला दिन आने वाली शाम वैसी ही होगी जैसी आप कलपना करते हैं जैसी अपकी उमीद है साल ख़तम होने को आया है हर साल हम कुछ न कुछ सोचने के इस साल हम ये करेंगे वो करेंगे ये चोड़ेंगे ये पाएंगे क्या साल वैसा ही गुज़रा जैसे आपने सूचा था या कुछ भिन भिन घटनाएं घटी और घटनाओं के जो परिणाम थे कुछ बहतर थे कु जीवन को हम कंट्रोल नहीं कर सकते और जब हम इस जीवन के साथ जुड़ते हैं इसकी लेमे चलते हैं तो एक अराम होता है एक सहजता होती है एक विश्राम होता है एक लीला होती है अदर वाईज हम जूझते रहते हैं जूझते रहते हैं जूझते रहते हैं आमारा कंट्रोल छूटता नहीं है और इसी को साक्षी भाव से जीना कहा गया है यही गीता का सार है यही परमात्मा की भक्ति है यही करम मारग है यही ध्यान मारग है ध्यान और कु ये भी हो सकता है ये सुन्ते हुए आपके अंदर का करमट व्यक्ति बहुत विरोध महसूस करें उसको ये सूत्र बहुत डिप्रेसिंग लगे ये आपका एहंकार है जो विरोध कर रहा है जिसे लगता है कि मैं हूँ जो जीवन को चलाता है एक कहानी याद आ गई बड़ी प्यारी और मज़ेदार कहानी है एक बार एक हाथी पुल को पार कर रहा था उसके ऊपर चीटी बैठी हुई थी हाथी जब पुल को क्रॉस कर रहा था तो पुल हिल रहा था हाथी के भार से जब हाथी ने पुल को क्रॉस कर दिया तो चीटी हाथी को बोलती है देखा बेटा कैसे मैंने पुरे पुल को हिला दिया हमें ऐसे लगता है कि जीवन को हम कंट्रोल कर रहे है इसमें इस सूत्र में एक लिबरेशन है एक फ्रीडम है यह डिप्रेसिंग नहीं है इसको समझना नहीं है इसको जानना है कि कैसे हम जीवन को कंट्रोल करते रहते हैं लेकिन नहीं कर पाते और नहीं कर पाने के बाद एक दुख होता है एक असहजता होता है एक कश्ट होता है एक संगर्श होता है तो जब हम चुड़ते हैं तो अराम होता है प्रेम होता है तो इसके ऊपर मनन कीजिए इसको देखिए अगर आपको ये बाद ठीक नहीं लग रही है तो इसको अपने पास रख लीजिये ना तो इसका विरोद कीजिए ना इसको अपना ये जब तक � आपके लिए प्रकट नहीं होती तो मेरी परमात्मा से परार्थना है के जीवन के घटने में आप ना घटे बलकी फैलावट और मिठास महसूस करें नमस्ते
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