नमस्ते मेरा नाम ब्रह्मन है। आज हम ओम ध्यान का अभ्यास करेंगे। कहा जाता है ओम की ध्वनी ब्रह्मान में गुञ्शने वाली ध्वनी है। इस ध्यान को करने से किसी भी तरीकी का तनाव या बारीपन पिंघल जाता है। और आप अपने अंदर बसी एक कहरी शान्ती को महसूस कर पाते हैं। बैठने के लिए एक कमफर्टेबल जगे ढूंढ ले जहां आपको कोई डिस्टर्ब ना करें। यह ध्यान आप किसी भी आसन में बैठ कर सकते हैं। जो भी आपके लिए कमफर्टेबल हो। आप अपने सपोर्ट के लिए तक्ये ये कुशन का भी यूज़ कर सकते हैं। अगर आप चेर पर बैठे हैं तो अपने पाउं को जम्मीन पर टिका कर रखें। हाथों को गुटनों पर रखें या अपनी गोद में रखें। हम कुछ बातों का ध्यान रखेंगे। जब आप ओम का उद्गीत करते हैं तो आ,
ओ,
और म के बोलने का समय बराबर होना चाहिए। लेकिन शुरुवात में अगर ये बराबर नहीं भी है तो कोई बात नहीं। हम नाग से गहरी लंबी श्वांस लेंगे और हर जाती हुई श्वांस के साथ ओम का उद्गीत करेंगे। हम लगबग दस मिनट तक इस बरीक्रिया को दोराएंगे और उसके बाद उतनी ही देर मौन में बैठेंगे। अगर आपको बीच में ठकान मैसूस हो तो आप कुछ सेकिन्स के लिए रेस्ट कर सकते हैं। ओम चांटिंग के समय सीधा बैठना जरूरी है अपनी कमर को बिल्कुल सीधा रखें और हतेलियों को अकाश की तरफ रखें। चांट को केवल जब की तरह ना करें बल्कि इसे गाते हुए अपनी पुरी चेतना से सुने और शरीर में होने वाली वाइबरेशन्स कमपन को मैसूस करें। और जब आपको एहसास हो आप केवल जब कर रहें लेकिन उसमें मोजूद नहीं है तो धीरे से अपना ध्यान ओम की द्वनी पर और उससे उत्पन होने वाली कमपन पर वापस लाएं। अपनी शरीर के हर हिस्से को ओम की उद्गीत में जादा से जादा डूपने दे। चल ये शुरू करते हैं यदि आपने आकें पहले से बंद नहीं की हैं तो उन्हें बंद कर लें अपने सिर,
करदन,
औरीड के हड़ी को बिल्कुल सीधा रखें ध्यान रहें शरीर में कोई तनाव ना हो अपने माथे को ढिला छोड़ दें अपनी आखों को अराम दें अप पूरे शरीर को एक्टम शिथिल कर लें अपने आथों को गुटनों पर रखें ये अपनी गूद में रख लें अब आप भियास के अंत तक स्थिर बैटनी का एक मानसिक संकल्प लें और यदि फिर भी ध्यान के दोरान आपको किसी भी समय अपनी शरीर के किसी भी हिस्से क शरीर को पहसूस करें और शरीर के अलग-अलग हिस्सों में होने वाली सम्वेद्नाओं को देखनी की कोशिश करें अपने शरीर की नैचरल स्थेट को फिल करें अब एक घहरी धीमी और होश्पुन श्वास लें और श्वास छोड़ते वे ओम के उदगीत को शुरू करें अपने शरीर की नैचरल स्थेट को फिल करें अब एक घहरी धीमी और होश्पुन श्वास लें अब एक घहरी धीमी और होश्पुन शुरू करें अपने शरीर की नैचरल स्थेट को फिल करें अब एक घहरी धीमी और होश्पुन शुरू करें अब एक घहरी धीमी और होश्पुन शुरू करें अब एक घहरी धीमी और होश्पुन शुरू करें आँ आँ आँ कुछ समय के लिए अपने अंदर किस घहं शान्ती को महसूस कीजिए अपने होने के अहसास को महसूस कीजिए अपने अंदर के आकाश को महसूस कीजिए अपने अंदर के शान्ती को महसूस कीजिए और उसके साथ एक होश एक जागरती एक सहजता एक आनंद की अनुभूती करीर में होने वाले कमपन,
दर्द,
खुजली,
सुकद या प्री अनुभूती के प्रती,
अपने आसपास से आने वाली आवाजों के प्रती एक होश,
एक साक्शी भाव बनाए रखें,
अपने अंदर की मौन,
शान्ती,
प्रेम इस अकाश को महसूस कीजिए,
इसका आनंद लीजिए जब आपको हिसास हो,
क्या विचारों में खो गए हो,
तो वापिस अपना ध्यान,
इस मौन,
इस शान्ती पर वापिस ले आए अब इससे पहले कि हम अपना अभ्यास हमाप्त करें,
आपके लिए एक होमवर्क है,
जब भी आप अपना हाथ दोएं,
तो पुरी जाकुरुक्ता के साथ अपने हाथों पर पानी की आवास और उसके सपर्श को सुनें और उसको महसूस करें,
अब यदि आप वापिस आना च नमस्ते मुद्रा में एक साथ लाएं और आपस में रब करें और अपने हाथेलियों की गर्माहट को अपनी आखों के ऊपर,
अपने पुरे चहरे पर महसूस करें और धीरे से अपनी आखे खोलें,
मेरे साथ दिहान करने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद,
आपका �