प्रणाम साधक मन का विचारों पे और विचारों का मन पे अधिकार होता है.
यदि हमारे विचार विवस्थित हैं तो मन सैयम में होता है और मन सैयम में होता है तो विचार भी विवस्थित हो जाती है.
हम मन से भी शुरू कर सकते हैं कि उसको सैयम में ले आए हम विचारों से भी शुरू कर सकते हैं कि उसको विवस्थित कर ले.
मन से शुरू करना थोड़ा कठिन है इसलिए हम अपनी साधरा विचारों को विवस्थित करने से शुरू करते हैं.
उसके लिए सबसे पहले हम अपने शरीर को शांत कर लेते हैं.
शरीर शांत हो जाता है उसके बाद हम अपने श्वासों को शुन्य करने की कोशिश करते हैं.
श्वास जब हमारे नियंतरन में आ जाते हैं उसके बाद हम अपना हमारा मन जो है उसके बाद हम ओम का उचारण करते हैं और ओम के उचारण से हम अपने विचारों को शुरू कर देते हैं.
जब विचार शुरूने हो जाते हैं तो हमारे अंदर से एक स्फूर्णा जागती है,
एक जागरिती होती है,
जो सुप्त क्षम्ताएं हमारी हैं,
वो जागरित होके हमारे अंदर प्रतिभूत होती है.
हम अपना आज का सेशन अपने शरीर से शुरू करते हैं,
तो आईए,
बहुत ही अराम दे पुजिशन में बैठ जाएं,
आँखें धीरे धीरे धीरे धीरे आँखें बंग कर लें,
लंबा सा श्वास ले के छोड़ दें,
दो तीन लंबे सांस अपनी गत्य अनुसार लें,
ध्यान कंधों पे ले के जाएं,
कंधे धीले धीले धीले एकदम धीले,
गर्दन का पिछला भाग धीला धीला धीला,
गर्दन का अगला भाग धीला धीला धीला,
दोनों कन पटियों की नसें शान,
पूरा मस्तक शान,
पूरे मस्तक में शान थी,
कानों के पीछे शान थी,
कोई भी मास पिशी,
हमारे कंधे की,
गर्दन की,
और सिर की तनाव में नहीं है,
एकदम शान,
सिर का सारा बोजा समान,
दोनों बुजाएं शान,
दोनों कलाईयां शान,
पीठ शान,
पेट शान,
छाती शान,
दोनों लातें शान,
पैरों के जोड धीले,
धीले,
धीले,
लातों के जोड सभी धीले,
धीले,
धीले,
पीठ एकदम धीली,
धीली,
धीली,
पेट के सभी मास वेशियां धीली,
धीली,
धीली,
पूरा मस्तक शान,
एकदम शान,
लंबा सा श्वास लेके उसे छोड़ें,
जब श्वास अंदर आये तो नाक में जाये,
नाक में थोड़ी सी ठंडक का अनुभव करें,
गले,
गले से नीचे च्छाती,
च्छाती से नीचे नाभी को अंदर से स्पर्श करती हुई हमारी सांस,
लंबी सी सांस,
सहज सांस,
बिल्कुल सहज,
कहीं भी जोर नहीं,
कोई भी आवाज नहीं,
पेट का फूलना,
च्छाती का फूलना,
उनका अनुभव करें,
सांस लेते हुई,
एकदम शान्त,
साधक शान्त,
लेकिन सजग,
शान्त,
लेकिन सजग,
शान्त,
लेकिन सजग,
ओम शान्तिः,
शान्तिः,
शान्तिः,
तृताप से शान्ति,
तीन तरांके ताप,
आधी दैविक,
आधी बौतिक,
आध्यात्विक,
तीनो ताप से शान्ति,
तृताप शान्ति,
ओम शान्ति,
शान्ति,
शान्ति,
अब हम ओम का उचारण करेंगे,
शान्स लेंगे,
शान्स को अपने नाभी तक लेके जाएंगे,
और उसके बाद हम अपना ध्यान अपने ओम के उचारण पर करेंगे,
ओम का उचारण आगे पीछे शुरू हो सकता है,
उस पर ध्यान नहीं देना,
ध्यान इस बात पर देना ह हम दोनों की तरंगे आपस में मिल रही हैं,
ओम का उचारण शुरू करते हुए,
होंट ओ का अकार गुलाकार बनेगा,
और मह तक पहुँँचते पहुँँचते,
उपर का होंट,
पीछे वाले होंट पर बहुत ही सहज तरीके से बैठ चायें,
शुरू करते हैं,
लंबा सा सा ओम वन में शान्ती का,
शान्ती की अनुभूती करें,
अद्भूत प्यारी सी शान्ती,
फलकी सी मुस्कान मूपे,
और अद्भूत प्यारी सी शान्ती,
और फूदपूर शान्ती,
इस वर्तमान ख्षन में हमारा मन बिल्कुल शान्त है,
कोई भी विचार नहीं आ रहा है,
जब कोई विचार नहीं आता,
तो अंदर से एक ब्लिस्,
जिसको कहते हैं,
एक खुशी सी भर जाती है,
अगर हम अपने शरीर का नरिख्षन करें,
तो हमारा माथा एक दम खुश है,
आँखें खुश है,
कान खुश है,
नाग खुश है,
मूँ खुश है,
गर्दन खुश है,
बाजवे खुश है,
पीट,
पेट,
लाते,
पैर,
अंग,
प्रति अंग,
अंदर से सभी खुश हैं इस वर इस समय कोई चिन्ता नहीं है,
हम जब सुबह उठे थे,
हम अपने आज के इस वर्तमान ख्षन की अगर हम सीमाएं बनाएं,
कि हमारे आज के इस वर्तमान ख्षन की अगर हम सीमाएं बनाएं,
कि हमारे आज के इस वर्तमान ख्षन की अगर हम सीमाएं बनाएं,
कि हमारे आज क कि हमारे आज के इस वर्तमान ख्षन की अगर हम सीमाएं बनाएं,
कि हमारे आज के इस वर्तमान ख्षन की अगर हम सीमाएं बनाएं,
कि हमारे आज के इस वर्तमान ख्षन की अगर हम सीमाएं बनाएं,
कि हमारे आज के इस वर्तमान ख्षन की अगर हम सीमाएं बनाएं बनाए कि हमारे आज के इस वर्तमान ख्षन की अगर हम सीमाएं बनाएं,
कि हमारे आज के इस वर्तमान ख्षन की अगर हम सीमाएं बनाएं बनाएं,
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कि हमारे आज के इस वर्तमान ख्षन की अगर ह हमारे आज के इस वर्तमान ख्षन की अगर हम सीमाएं बनाएं बनाएं,
कि हमारे आज के इस वर्तमान ख्षन की अगर हम सीमाएं बनाएं बनाएं,
कि हमारे आज के इस वर्तमान ख्षन की अगर हम सीमाएं बनाएं बनाएं,
कि हमारे आज के इस वर्तमान ख्षन की अगर हम स सीमाएं बनाएं बनाएं,
कि हमारे आज के इस वर्तमान ख्षन की अगर हम सीमाएं बनाएं बनाएं बनाएं,
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कि हमारे आज के इस वर्तमान ख्षन की अगर हम सीमाएं बनाएं बनाएं बन यह अच्छा ख्षन की अगर हम सीमाएं बनाएं बनाएं बनाएं बनाएं बनाएं बनाएं बनाएं बनाएं बनाएं बनाएं बनाएं बनाएं बनाएं बनाएं बनाएं बनाएं बनाएं बनाएं बनाएं बनाएं बनाएं बनाएं बनाएं बनाएं बनाएं बनाएं बनाए करने के लिए 40 लिए करने के लिए करने के लिए करने के लिए करने के लिए करने के लिए करने के लिए करने के लिए करने के लिए करने के लिए करने के लिए करने के लि� करने के लिए करने के लिए करने के लिए करने के लिए करने के लिए करने के लिए करने के लिए करने के लिए करने के लिए करने के लिए करने के लिए करने के लिए क� करने के लिए करने के लिए करने के लिए करने के लिए करने के लिए करने के लिए करने के लिए करने के लिए करने के लिए करने के लिए करने के लिए करने के लिए क�