नमश्कार साधक,
आप सबका आज इस 70 दिवसीय शिवर के दूसरे दिन में स्वागत हैं.
एक रोचक प्रसंग से शुरू करते हैं,
इतने तक और लोग भी जुड़ जाएंगे.
जब कुलंबस ने अमरिका की डिस्कवरी करी,
तो उसके बाद वापस आके उसने स्पेन में गोशना करी कि मैंने भारत पहुंचने का एक नया रास्ता ढूंढ लिया.
और उस वक्त भारत जो था वो एक सोने की चुड़िया था.
तो सोने की लालसा में,
सोने की अभिलाशा में,
सोने के लिए जितने भी वहाँ के महतोकांशी लोग थे,
जितने भी असमाजिक तत्व थे,
हर व्यक्ति ने सोचा कि मैं सोना लेके आता हूँ उस जगा से जहां से उस स्थान से जिसको कुलंबस ने डिस्कवर किया.
इंगलेंड की खानों में काम करता वह एक लड़का था,
वह कोईला खोधता था,
उसने कहा मेरे में तो बहुत अच्छा टेलन्ट है,
मैं तो खुदाई कर सकता हूँ.
जहां जा रहा था,
उसने कोईला ढोने की नौकरी ले लिए और पहुंच गया अमरिका,
वहां पहुंच ने अपने जगा उन्होंने नियमित कर रखी थी और अपने अपनी जगा में खुदाई कर रहे थे,
कहीं जगा मिली नहीं उसको खुदाई करने की,
उसके पास टेलन्ट भी था,
उसके पास तरीक करने के आजार भी थे,
लेकिन जगाई नहीं थी,
कहां करे वो,
पूरा दिन घूमता रहा,
पूरे गाओं में घूमता रहा,
शाम को अताश होके एक पेड़ के नीचे आके बैठ गया,
एक बुड़ा आया वहाँ भी,
उसने पुछा,
बेटे जी,
आप इतने दुखी होके क्यों बैठे हुए हो?
उसने कहा,
क्या पताओ गुर्देव,
आया तो मैं इतनी बेटे ऐसे कर,
ये नदी है न,
इसको पार करके और टापू पे चला जा,
वहाँ तीन दिन में सोना मिल जाता है,
और खोदना कितना पड़ता है,
बस तीन फूट,
तीन फूट खोदो और तीन दिन में सोना ले लो,
वह बढ़ा उत्साहित हुआ,
उसी वक्त रात को अंधेरे और उसपे एक बोर्ड लगा हुआ है,
ये ख़दान बिका हुआ है,
तो उसने देखा,
अरे वाह,
ये तो,
उससे पूछा,
कितने की है,
उसने कहा,
चार चान्दी के सिक्के दे दो,
ये ख़दान तुमारी,
उसने कहा,
ये लो,
सिक्के लो,
ख़दान दे दो मेरे को,
उस ने उसी वक्त खोदना शुरु किया,
टबार तोड़,
टबार तोड़,
खोद ता गया,
खोद ता गया,
खोद ता गया,
जब नापा तो,
वो छे वुट खोज चुका था,
सोने का कही,
नामों शान नहीं,
बगले दिन खोद ता रहा,
रोज खोद ता था,
रोज सुबह गु� खोद गई अंदर,
सोने का कही,
नामों शान नहीं,
बहुत हताश हुआ,
बहुत दुखी हुआ,
व्यतित हुआ,
उसने कहा इससे अच्छा तो मैं इंग्लेंड में ही था,
यहाँ पे मैं कोईला खोता था,
ढोता था,
रात को दो पैसे मिलते थे,
खाता था,
पीता था,
सो जात यहां मेरी दाल नहीं गलेगी,
वापस ही चलते हैं,
निकल के आया,
हताश होके,
उसने जो बोर्ड पढ़ा हुआ था,
उसको जाड़ पोच के साफ किया,
और फिर लगा गिया,
यह ख़दान बिका हुआ,
एक और लड़का आया वहाँ पर,
उसके ख़दान बिका हुआ,
कहता ह कितने की,
चार चांधी के सिक्को में करी रही थी,
चार चांधी के सिक्को में देदूंगा तुमको,
चांधी के सिक्को में चार येलू,
देदू,
और बड़े ही निधाल सा होके,
अनमने मन से हो,
नदी को पार करने लगा,
जब पार कर रही रहा था,
तो जिसने नई ख़दा खरीदी थी,
उसने पुछा सोना कहा मिलेगा,
कहता बस तीन फूट खोद दो,
तीन फूट पर सोना मिलता है,
तीन फूट खोद दो,
तीन दिन में तीन फूट पर सोना मिलता है,
उसको भी यही बताया था,
चला गया नदी पार करके अपना जहाज पकड़ा उसने और वापस पहले व्यक्ती ने सोने से तीन फूट पहले ही खोदना चाहिए,
पहले व्यक्ती ने सोने से तीन फूट पहले ही खोदना चाहिए,
पहले व्यक्ती ने सोने से तीन फूट पहले ही खोदना चाहिए,
पहले व्यक्ती ने सोने से तीन फूट पहले ही खोदना चाहिए पहले व्यक्ती ने सोने से तीन फूट पहले ही खोदना चाहिए,
पहले व्यक्ती ने सोने से तीन फूट पहले ही खोदना चाहिए,
पहले व्यक्ती ने सोने से तीन फूट पहले ही खोदना चाहिए,
पहले व्यक्ती ने सोने से तीन फूट पहले ही खोदना चाहिए,
पहले व्यक्ती ने सोने से तीन फूट पहले ही खोदना चाहिए,
पहले व्यक्ती ने सोने से तीन फूट पहले ही खोदना चाहिए,
पहले व्यक्ती ने सोने से तीन फूट पहले ही खोदना चाहिए,
पहले व्यक्ती ने सोने से तीन फूट पहले ही खोदना चाहिए,
पहले व्यक व्यक्ती ने सोने से तीन फूट पहले ही खोदना चाहिए,
पहले व्यक्ती ने सोने से तीन फूट पहले ही खोदना चाहिए,
पहले व्यक्ती ने सोने से तीन फूट पहले ही खोदना चाहिए,
पहले व्यक्ती ने सोने से तीन फूट पहले ही खोदना चाहिए,
पहले व्यक व्यक्ती ने सोने से तीन फूट पहले ही खोदना चाहिए,
पहले व्यक्ती ने सोने से तीन फूट पहले ही खोदना चाहिए,
पहले व्यक्ती ने सोने से तीन फूट पहले ही खोदना चाहिए,
पहले व्यक्ती ने सोने से तीन फूट पहले ही खोदना चाहिए,
पहले व्यक पहले व्यक्ती ने सोने से तीन फूट पहले ही खोदना चाहिए,
पहले व्यक्ती ने सोने से तीन फूट पहले ही खोदना चाहिए,
पहले व्यक्ती ने सोने से तीन फूट पहले ही खोदना चाहिए,
पहले व्यक्ती ने सोने से तीन फूट पहले ही खोदना चाहिए,
पहले बहुत कुछ बदल जाएगा,
जो चोटी चोटी चीज़ों को हम सोचते हैं,
ये बढलनी बहुत मुश्किल है,
मेरे को तो गंदी आदत लगी हुई है,
मैं तो वाटस्याब को छोड़ी नहीं सकता,
ये आतें तो बहुत चोटी सी रह जाएगी,
हमारी इंटरनल ट्रांस्व है,
हमने किसी भी पीछे मुढ के दर्वाजे से पीछे नहीं मुढना,
जब हमारा मन करें के ये नहीं,
अब नहीं करना,
हो गया बस,
बहुत बोरियत आया,
इसमें कुछ है ही नहीं,
उसी टाइम हमें ये स्वर्ण करना है,
ये एक पीछे मुढ का दर्वाजा है,
जो इस � के साथ हमारे को आ रहा है,
तो आईए,
शुरू करते हैं,
मैं अलारम लगा दूँगा,
लेकिन मैं बताता नहीं कितनी देर का अलारम लगाया है,
और हम ओम का उचारन करेंगे,
ओम का उचारन करने में सबसे पहली चीज़,
आज एक चीज़ और नहीं करेंगे,
सबसे पहले ह आज एक चीज़ और नहीं करेंगे,
सबसे पहले चीज़ और नहीं करेंगे,
सबसे पहले चीज़ और नहीं करेंगे,
सबसे पहले चीज़ और नहीं करेंगे,
सबसे पहले चीज़ और नहीं करेंगे,
सबसे पहले चीज़ और नहीं करेंगे,
सबसे पहले चीज़ और नहीं क करेंगे,
सबसे पहले चीज़ और नहीं करेंगे,
सबसे पहले चीज़ और नहीं करेंगे,
सबसे पहले चीज़ और नहीं करेंगे,
सबसे पहले चीज़ और नहीं करेंगे,
सबसे पहले चीज़ और नहीं करेंगे,
सबसे पहले चीज़ और नहीं करेंगे,
सबसे पहले चीज और नहीं करेंगे,
सबसे पहले चीज़ और नहीं करेंगे,
सबसे पहले चीज़ और नहीं करेंगे,
सबसे पहले चीज़ और नहीं करेंगे,
सबसे पहले चीज़ और नहीं करेंगे,
सबसे पहले चीज़ और नहीं करेंगे,
सबसे पहले चीज़ और नहीं करेंगे,
सबसे प सबसे पहले चीज़ और नहीं करेंगे,
सबसे पहले चीज़ और नहीं करेंगे,
सबसे पहले चीज़ और नहीं करेंगे,
सबसे पहले चीज़ और नहीं करेंगे,
सबसे पहले चीज़ और नहीं करेंगे,
सबसे पहले चीज़ और नहीं करेंगे,
सबसे पहले चीज़ और नह चीज़ और नहीं करेंगे,
सबसे पहले चीज़ और नहीं करेंगे,
सबसे पहले चीज़ और नहीं करेंगे,
सबसे पहले चीज़ और नहीं करेंगे,
सबसे पहले चीज़ और नहीं करेंगे,
सबसे पहले चीज़ और नहीं करेंगे,
सबसे पहले चीज़ और नहीं करेंगे,
सबसे पहले चीज़ और नहीं करेंगे,
सबसे पहले चीज़ और नहीं करेंगे,
सबसे पहले चीज़ और नहीं करेंगे,
सबसे पहले चीज़ और नहीं करेंगे,
सबसे पहले चीज़ और नहीं करेंगे,
सबसे पहले चीज़ और नहीं करेंगे,
सबसे पहले चीज़ और नह और याद करें इस ओम के उच्छारण के दोरान हमारे मन में कितने विचार आए जब भी कोई विचार ऐसा आए कि मैं छोड़ के आगे जाना चाहता हूँ,
उस विचार को पकड़ें और साइट पे करो और उसे बोले मेरा पीछे मड़ दर्वादा अभी आया नहीं है,
एक बार आखें बंद करें और अपने पूरे शरीर को एकदम शांत कर ले,
आखें शांत गर्दन की नसें बिल्कुल धीली,
धीली,
धीली,
गंधे की नसें एकदम धीली,
धीली,
धीली,
गंपटियों की नसें धीली,
धीली,
धीली,
पीट की नसें धीली,
धीली,
धीली,
धीली,
धीली,
धीली,
धीली,
धीली,
धीली,
धीली,
धीली,
धीली,
धीली,
धीली,
धीली,
धीली दोनों बुजाएं सब मास्पेशिया एकदम धीली,
धीली कलाईयों के जोड धीले,
धीले,
धीले दोनों लातें एकदम मसल्स धीले,
धीले,
एकदम धीले पैरों के जोड धीले,
धीले,
धीले पूरा शरीर एकदम शाम,
शाम,
मन शाम सभी विचार शाम,
शाम,
शाम ईर्शा शाम,
क्रोध शाम मन में एकदम शांती,
ऐसा इमैजिन करें के माथे के अंदर एक बहुत गहरी लेक है और उसका जल एकदम शांत है,
चारों तरफ पेड़ है और उन पेड़ों से पत्ती एक गिरती है तो पानी के उपर बहुत हल्की सी तरंग आ जाती है,
तरंग पानी के खुशी की है,
एकदम शाम,
शाम,
शाम कोई भी बाहर से आवाज आ रही है उससे किल्कुल विचलित नहीं होना,
जो भी उस आवाज के साथ memory associated है वो एकदम शाम,
मन शांत विचार शाम,
मन शांत विचार शाम सांस बिल्कुल सहेज,
इतनी सहेज और थीमी सांस कि उसका अभास भी नहीं हो रहा है और अंदर जब जा रही है बिल्कुल नाभी को चू रही है धीरे धीरे अपनी आखें खो रहे हैं मन,
बुद्धी,
अहंकार इन सब को स्थिर करेंगे और फिर ध्यान लगाएंगे,
ध्यान की प्रक्रिया में जब हम गुज़ जाएंगे तब हम ओम का उचारन बहुत कम समय के लिए करेंगे,
जादा समय ध्यान में लगाएंगे,
ध्यान को बढ़ाएंगे,
ध्यान बढ़ता जाएगा,
तो उसी से हमारी धारना जो है वो और सबल मिलेगी,
हमको शिवसंकल प्राप्त होगी,
आज के लिए इतना ही,
कल फिर सुहे साद बजे हम दुबारा मिलेंगे,
इस सत्तर दिर्सीय शिंखला के तीसरे दिन पे,
जो की सबसे मुश्किल दिन होता है,
आप सब को नम ओम ही सत्य है,
ओम ही सत्य है