प्रणाम साधक!
प्रणाम साधक!
हम अपनी इस यात्रा में 14 दिन पूरे कर चुके हैं और इन 14 दिनों में हमने एक ध्यान करने की पद्धती अपने अंदर दृड़ भूमी कर ली हैं.
हम सबसे पहले अपने शरीर को स्थिर और शांत करते हैं फिर हम अपने श्वासों को नियंत्रन में लेके आते हैं और उसके बाद हम ओम का उचारन करते हैं.
ओम का उचारन करते करते हम ध्यान में मगन हो जाते हैं.
आज से हम इस शिंख्रा में एक और स्थर पर जा रहे हैं.
प्रति दिन जब हम ध्यान में मगन होंगे तो हम एक श्रेणी के विचारों को विवस्थित करेंगे.
रोज एक नई श्रेणी के विचारों को विवस्थित करेंगे और जब हमारे विचार विवस्थित हो जाएंगे तो मन नियंत्रन में आ जाएंगे.
और नियंत्रन मन हमारी सभी सूक्ष्म सत्ताओं को आमंत्रन देगा.
हमारी सूक्त शम्ताएं भी जागेंगी.
और हम अपने आप,
अपने अंदर एक बहुत बड़ा बदलाव अनुभव करेंगे.
ये एक सहज प्रकरिया है,
इसमें समय लगता है क्यूंकि हमने अपनी पूरी जिंदगी के 50,
60,
30,
40 साल वो ही किया है जिससे मन अनियंत्रित रहता है.
तो नियंत्रित मन को करने के लिए हम इस पद्धति में,
आज से हम प्रति दिन एक नई शंकला के,
नई शेणि के विचारों को प्रति दिन अपने पकड से रिलीज करेंगे.
हम एक नई शंकला के लिए प्रति दिन एक नई शंकला के लिए प्रति दिन एक नई शंकला के लिए प्रति दिन एक नई शंकला के लिए प्रति दिन एक नई शंकला के लिए प्रति दिन एक नई शंकला के लिए प्रति दिन एक नई शंकला के लिए प्रति दिन एक नई श पूरा शरीर एक दम अराम दे कर ले किसी भी जगा से कोई भी हमको डिस्ट्रेक्शन हमारी बॉडी से नहीं हो रहा है लंबा सा सांस ले के छोड़े एक बार फेर सांस नाक से अंदर जाएगा गला गले से पेट पेट से नाभी नाभी को अंदर से चुए और सांस को छोड़े अपनी आखे धीरे धीरे बंद कर ले और एक भूद पूर आनंद का अनुभव करे आनंद और शान्ती कंदे की नसे धीली धीली धीली गर्दन की नसे धीली धीली धीली कनपटियों की नसे धीली धीली धीली मस्तक की मांस्पेशिया धीली धीली धीली मस्तक एकदम शान सभी क्रोधाग्निया शान सभी विचार शान सभी कल्पनाय शान सभी स्मृतिया शान दोनों बुजाये धीली धीली धीली कोनियों के जोड धीले धीले धीले कलाईयों के जोड धीले धीले धीले पूरी पीठ धीली धीली धीली दोनों कुले धीले धीले धीले जंगाये धीली धीली धीली गुटनों के जोड धीले धीले धीले एडियों के जोड धीले धीले धीले पूरा शरीर शाँग पूरा शरीर स्थेर श्वास एकदम सहज चोटी सहज मध्यम सहज लंभी सहज पूरा ध्यान श्वास पे केंद्रित सब जगा से ध्यान बटोर के अपने श्वास पे केंद्रित कर ले सहज श्वास बहुत धीमी श्वास जग श्वास धीमी हो जाती है मन में विचार उठने बंध हो जाते हैं धीमी श्वास अत्यंत धीमी श्वास श्वास की गहराई नाभी तक अंदर आने वाले श्वास की गहराई नाभी तक सहज एकडम धीमी श्वास अत्यंत धीमी श्वास पूरा ध्यान श्वास पे बटोर लो पूरा ध्यान श्वास पे बटोर लो कोई कलपना नहीं कोई स्मृति नहीं पूरा ध्यान श्वास पे बटोर लो केवल शान्ती और आनन शान्ती ही शान्ती ही शान्ती ही ओम का उचारन शुरू करते हैं