प्रणाम साधक आज हम वहीं से शुरू करेंगे जहां हमने कल छोड़ा था आज हम वहीं से शुरू करेंगे जहां हमने कल छोड़ा था आज हम वहीं से शुरू करेंगे जहां हमने कल छोड़ा था आज हम वहीं से शुरू करेंगे जहां हमने कल छोड़ा था हमने कल करेंगे जहां हमने कल करेंगे जहां हमने कल करेंगे जहां हमने कल करेंगे जहां हमने कल करेंगे जहां हमने कल करेंगे जहां हमने कल करेंगे जहां हमने कल करेंगे जहां हमने कल करेंगे जहां हमने कल करेंगे जहां हमने कल करेंगे जहां हमने कल करेंगे ज यहां हमने कल करेंगे जहां हमने कल करेंगे जहां हमने कल करेंगे जहां हमने कल करेंगे जहां हमने कल करेंगे जहां हमने कल करेंगे जहां हमने कल करेंगे जहां हमने कल करेंगे जहां हमने कल करेंगे जहां हमने कल करेंगे जहां हमने कल करेंगे जहां हमने कल करेंगे जहां हमने कल करेंगे जहां हमने कल करेंगे जहां हमने कल करेंगे जहां हमने कल करेंगे जहां हमने कल करेंगे जहां हमने कल करेंगे जहां हमने कल करेंगे जहां हमने कल करेंगे जहां हमने कल करेंगे जहां हमने कल करेंगे जहां हमने कल करेंगे जहां हमने कल करेंगे जहां हमने क करेंगे जहां हमने कल करेंगे जहां हमने कल करेंगे जहां हमने कल करेंगे जहां हमने कल करेंगे जहां हमने कल करेंगे जहां हमने कल करेंगे जहां हमने कल करेंगे जहां हमने कल करेंगे जहां हमने कल करेंगे जहां हमने कल करेंगे जहां हमने कल करेंगे जहां हमने कल करें� हमने कल करेंगे जहां हमने कल करेंगे जहां हमने कल करेंगे जहां हमने कल करेंगे जहां हमने कल करेंगे जहां हमने कल करेंगे जहां हमने कल करेंगे जहां हमने कल करेंगे जहां हमने कल करेंगे जहां हमने कल करेंगे जहां हमने कल करेंगे जहां हमने कल करेंगे जहां हमने क मन का विचारों पे और विचारों का मन पे अधिकार होता है। अगर मन नियंत्रित है तो विचार विवस्थित होते हैं और विवस्थित विचारों से मन को नियंत्रन में लाया जा सकता है। विचारों को विवस्थित करने के लिए सरवप्रथम हम अपने शरीर को शांत करते हैं। शांत शरीर में हमारा श्वास जो है वो नियंत्रित हो जाता है। और नियंत्रित श्वास के बाद हम जब ओम का उचारन करते हैं,
तो हमारी सूक्ष्व सत्ताएं जाग जाती हैं और सुप्त शम्ताएं विक्सित होती हैं। सूक्ष्व सत्ताएं और सुप्त शम्ताएं। आज जब हम ओम का उचारन करेंगे,
उसके अंत में मैं थोड़ी देर के लिए मौन रहूँगा। आप भी मौन रहें और मौन रहके अनुभव करें अंदर के खुशी और मन की शान्ती। आनंद और शान्ती को विचलित करने वाला कोई भी विचात नहीं होगा। हमारी ये पहली सूक्ष्व सत्ताएं की विक्सित परिधी है। हम शुरू करते हैं। लंबा सा सान्स ले के छोड़ दे। आखें दीरे दीरे दीरे आखें बंद कर ले। कंधे की नसे धीली धीली धीली एकड़म धीली। गर्तन की नसे धीली धीली धीली अत्यंत धीली। कनपटियो की नसे धीली धीली धीली। पूरा मस्तक्षा पूरा मस्तक्षा। सिर का सारा बोजा समा सिर का सारा बोजा समा। दोनों भुजाएं धीली धीली धीली। कोहनियों के जोड धीले धीले धीले। कलायों के जोड धीले धीले धीले। पूरी पीठ धीली धीली धीली। छाती धीली। दोनों पूले धीले जंगाएं धीली। दोनों लातों के सारे मास पेशिया धीली। पैरों के जोड धीले धीले धीले। पूरा शरीर शाम शाम। शांति ही शांति ही शांति ही। तृताप शांति ही। अध्यात्मिक शांति,
आदि देविक शांति,
आदि भौतिक शांति। शांति शांति शांति। पूरा शरीर स्थिर शांत। साधक अंदर से सजग। हर परिवर्तन पर साधक की पैनी नजर। आप सब मेरे साथ साथ ओम का उचारन करें। हमारे ओम की लंबाई कम जादा हो सकती है। हमें उस पे ध्यान नहीं देना। हमें ध्यान देना है जब हम दोनों के ओम की उचारन आपस में रेजोनेट कर रहे हैं। उस वक्त जब दोनों की बोलने की स्फूर्णा एक जैसी होगी,
उस वक्त हमको एक बहुत ही आनंद की अनुभूती होगी। हमारा ध्यान उस आनंद को ढूनने पे है,
हमारा ध्यान अपने ओम को शुरू करने या समाप्त करने पे नहीं है। दूसरी बात,
ओम का उचारन शुरू करें तो होंट को गोलाकार हो जाये,
और धीरे धीरे तक पहुंचते पहुंचते,
बिल्कुल सपार्थ हो जाये,
और उपर वाला होंट,
नीच वाले होंट पे बहुत अलके से तहर जाये,
अगर पीछ में थोड़ा सा गैप रह भी जाये तो कोई बात नहीं है,
और बिल्कुल म जो है वो बहुत ही सरल और सहज करें,
शुरू करते हैं,
ओम शान्ति,
शान्ति,
शान्ति,
उस अद्भुत शान्ति का अनुभव करें,
मन में शान्ति और आनन,
शान्ति और आनन,
ओम के उचारन से बहुत सुप्त शम्ताएं जागरत हो जाती हैं,
धीरे धीरे अपनी आखें खोलें,
उसी शान्ति और आनन्त का अनुभव अपने पूरे मस्तेशक में करें,
अंदर से एक बहुत ही प्यारा सा अनुभव हम सबको हो रहा है,
इस अनुभव से हमारी सबसे पहली सुप्त शम्ता जो जागती है,
वो है सकारात्मक्ता,
सकारात्मक्ता,
पूरे मस्तेशक में आखें खोलें और अनुभव का अनुभव नहीं खोलें,
अपने पूरे मस्तेशक में हम सबको हो रहा है,
हम सबको हमारी सबसे पहली सुप्त शम्ता जो जागती है,
वो है सकारात्मक्ता,
पूरे मस्तेशक में आखें खोलें और अनुभव का अ पूरे मस्तेशक में हम सबको हो रहा है,
हम सबको हमारी सुप्त शम्ता जो जागती है,
हम सबको हमारी सुप्त शम्ता जो जागती है,
हम सबको हमारी सुप्त शम्ता जो जागती है,
हम सबको हमारी सुप्त शम्ता जो जागती है,
हम सबको हमारी सुप्त शम्त जो जागती है हम सबको हमारी सुप्त शम्ता जो जागती है,
हम सबको हमारी सुप्त शम्ता जो जागती है,
हम सबको हमारी सुप्त शम्त जो जागती है,
हम सबको हमारी सुप्त शम्त जो जागती है,
हम सबको हमारी सुप्त शम्त जो जागती है,
हम सबको हमारी सुप्त शम्त जो जागती है,
हम सबको हमारी सुप्त शम्त जो जागती है,
हम सबको हमारी सुप्त शम्त जो जागती है,
हम सबको हमारी सुप्त शम्त जो जागती है,
हम सबको हमारी सुप्त शम्त जो जागती है,
हम सबको हमारी सुप्त शम्त जो जागती है,
हम सबको हमारी सुप्त शम्त जो जागत है,
हम सबको हमारी सुप्त शम्मत जो जागती है,
हम सबको हमारी सुप्त शम्म जो जागती है,
हम सबको हमारी सुप्त शम्म जो जागती है,
हम सबको हमारी सुप्त शम्म जो जागती है,
हम सबको हमारी सुप्त शम्म जो जागती है,
हम सबको हमारी सुप्त शम्म जो जाग जागती है,
अगर हम अपने उम प्राक्टिस जो जागती हैं,
हम सबको हमारी सुप्त शम्म जो जागती है,
हम सबको हमारी सुप्त शम्म जो जागती है,
आज के लिए इतना ही,
नमस्ते,
ओम ही सत्य है,
ओम ही सत्य है,
ओम ही सत्य है,