प्रणाम साधक मुदेद मन साधक हमने साथ जन्वरी को अपने इस अनुष्ठान को प्रारंब किया था और ईश्वर कृपा से आज सत्रा मार्ज को हम इस अनुष्ठान के सत्तर दिन पूरे करके अपने गंतवे पर पहुँच गए हैं ये एक बहुत बड़ा शिव संकल्प था हमारा और इस यात्रा में हमारे अंदर बहुत परिवर्तन हुए हैं साधक ये छोटा मोटा काम नहीं था ये बहुत बड़ा बीड़ा उठाया था हमने 20-21 दिन में लोग कहते हैं कि आदद बन जाती है पश्चिमी मनीशा के अनुसार अगर किसी कारे को 21 दिन तक किया जाये तो वो आदद बन जाता है और वो छूटता नहीं है हमने तो ये साधना सुबह की साधना सत्तर दिन तक करी है तो अब ये साधना हमारे जीवन की एक अभिन अंग बन गई है और पिछले दो दिन के सत्तरों से हमें अपने आप इसको करने की एक पढ़ती का भी ज्यान हो गया है अब हम आश्वस्थ हैं मैं आश्वस्थ हूँ कि आप इसको अब अपने आप अपनी पढ़ती से बढ़ा के अपनी साधना को और प्रगाड करेंगे एक मन में विचार उठता है कि क्या इस सत्तर दिनों में हमारे अंदर कोई परिवर्तन आया हम इसका कोई मुल्यांकन करें अगर मुल्यांकन करें तो हम किन मापदंडों पर इसका मुल्यांकन करें,
कि हमने सत्तर दिन तक साधना करी और हम इसका मुल्यांकन किस मापदंडों पर करें तो हम सबसे पहले साधक आप ये निश्चित करें कि आपके सुभाव में परिवर्तन आया है कि नहीं सबसे मूल भूत मापदंड है सुभाव में परिवर्तन और सुभाव में परिवर्तन कैसे आता है?
सुभाव में परिवर्तन आने का मापदंड है एकागरता में वृध्धी हमारी एकागरता में वृध्धी हुई है हम सत्तर दिन पहले तीन या चार उम के उच्छारण में हमारा मन उचड़ जाता था और अंत में पहुँँचते हमारा धे तो 30 मिरट का था लेकिन क्योंकि बाकी ध्यान भी लगाना था तो हम 10 मिरट तक उम का लगातार उच्छारण करने की सक्षमता हमने प्राप्त कर ली थी हमारी एकागरता में वृध्धी हुई और हमारे अंदर क्या परिवर्तन आया एक तो हमारा स्वभाव में परिवर्तन आ गया दूसरा हमारी एकागरता में वृध्धी हो गई तीसरा हमारे मन का भटकाव कम हो गया एक काम करते करते हम दूसरे की तरफ नहीं जा रहे अगर हम अपने ध्यान में लगे हुए हैं और हमारे फोन पे नोटिफिकेशन्स आते जा रहे हैं हम उस नोटिफिकेशन्स से दूर भी हट रहे हैं पहले हम आदत वश उसको उठा के देख लेते थे अब हम वो करना कम हो गया है सादक अपने अपने मन में इस चीज का आप अनुपव करें के हाँ थोड़ा कम हुआ है कुछ अंशों में कम हुआ है लेकिन कम हो गया है तो मन का भटकाव जो है वो भी हमारा कम हो गया है और चोथा परिवर्तन क्या है हमारा हमारा विशयों से राग कम हो गया है जिन चीजों की हमारी लालसा है जिस चीज के पीछे हम भागते थे जिस चीज को देखते ही हम दाएं बाएं हो जाते थे वो राग के हमको ये चीज चाहिए ही चाहिए वो कुछ अंशों में कम हो गया है वेर मिनिमम नेसेस्ट्री मिल जाये हैं हम बहुत अंशों में हैं इसका अनुभव करें सादक हमारे सत्तर दिन के प्रयास में ये अंधर यंदर से एक सुप्त ख्यम्ता जो थी हमारी कि हम अपने राग को दबा दें राग को कम कर दें वो ख्यम्ता जिससे हम राग की शक्ती को ख्यींड कर दें वो जागरित हुई है इसका भी अनुभव करें उसके बाद अगर हम देखें तो हमारी सहनशीलता भी बढ़ी है हमारी टॉलरेंस को बहुत अंशों कर रही है टॉलरेंस के प्रयास में कुछ भी नहीं हो पारा मन उचट गया है मन उचट गया है तो हम वहीं पे रहते हैं हम दाएं बाएं किसी विशे को नहीं पकड़ते हैं अपसंस अफ नौविल्टी जो हम इंस्टाग्राम पे ऐसे ऐसे ऐसे करके पहले दो दो घंटे देखते रहते थे वो दो घंटे से कुछ अंशों में कम हो गया है हम एक पोस्ट को जादा देर तक पढ़ने लग पढ़े हैं पहले हम शुरू के चार शब्द पढ़कर हम उसको आगे कर देते थे या केवल हेडलाइन पढ़कर आगे कर देते थे लेकिन अब हम ठहर गये हैं,
हमारी सहेंशीलता बढ़ गयी है हम उस पोस्ट को देखे उसकी हेडलाइन भी पढ़ते हैं और उसके नीचे लिखा हुआ जो है वो भी पूरा पढ़ते हैं फिर उसपे हम चिंतन करते हैं,
मनन करते हैं और देधिदासन करते हैं अपना वो एक लय में बद गया है,
हम जो भी अप पढ़ते हैं उसको पढ़ने के बाद हमारे अंदर उसके उपर हमारे अपने विचार बनने शुरू हो गये पूर्व आग्रह वाले विचार नहीं हमारे नव नूतन विचार बनने शुरू हो गये क्यों क्योंकि हम प्रणव के साथ हो गया है प्रणव यानि ओम नव नूतन नव नूतन से पहले के तो हमारी सहेंशीलता जो है वो भी हमारी बड़ी है और एक और चीज सादक आप द्यान देंगे हमारा क्रोध भी कम हो गया है स्वजनों पे क्रोध दुश्मनों पे क्रोध अंजान व्यक्तियों पे क्रोध दुश्मनों पे क्रोध तो हमारा लगबग उतना ही होगा हाँ दुश्मन कम हो गया है स्वजनों पे क्रोध कम हो गया है पहले ही कम था अब और भी कम हो गया है लेकिन जो अंजान व्यक्तियों पे हमारा क्रोध था वो खतम सा हो गया है हम गाड़ी चिलाते वे जा रहे हैं रास्ते में किसी ने वो टेक कर लिया पहले हम क्रोधित होके उसको वो टेक कर लेते थे अब वो नहीं करते हैं हमारा अंजान व्यक्तियों पे क्रोध कम हो गया है सादक इसका आप अनुभव करेंगे इस साधना का एक बहुत बड़ा लाब ये हुआ है कि हमारा अंजान व्यक्तियों के उपर क्रोध कम हो गया है हम इस साधना को आगे बढ़ाएंगे � हमने 70 दिन की करी है हम और आगे बढ़ाएंगे इसको तो हम देखेंगे हमारा क्रोध जो है वो तीनो तीनो स्थितियों में हमारा क्रोध जो है वो और भी ख्षीण होता जाएगा जब क्रोध ख्षीण होगा तो जो उर्जा क्रोध को बढ़ाती थी वो उर्जा हमारे संयम में मिल जाएगा और हमारी सेहन चीता बढ़ जाएगा सादक एक और चीद अगर आप ध्यान दें तो हमारी ईर्शा भी खतम हो गयी है अगर कोई और प्रगती कर रहा है तो हम उसकी प्रगती में खुशी में खुशी देख रहे हैं और उसकी प्रगती में हम उसको और भी � आप ये देखेंगे हमारी ईर्शा भी खतम हो गयी है दूसरों के पास अगर कोई वस्तु है और हमारे पास नहीं है तो हमको कोई ज़्यादा अंदर से मन को उद्वेलित करने की जरुवत नहीं है हमारी ईर्शा भी खतम हो गयी है हमारा भय भी खतम हो गया है अनकहा भय था अन्सेड और अन्नोन फियर भय भी हमारा कम हो गया है और बड़ा है तो क्या बड़ा है हमारा शिव संकल अब हम किसी भी अनुष्ठान को उठाने से पहले एक शिव संकल्प कर लेते हैं तो हमारा वो अनुष्ठान पूरा हो जाता है हर कारे को करने से पहले हम अगर एक शिव का स्मरन कर लेते हैं तो हमारा कारे वो तुरंत पूरा हो जाता है और शिव का स्मरन करना हमारे अंदर अब एक अटोमेटिक प्रोसेस हो गया है क्यूंकि सादना में हमने ओम का इतना उच्छारन किया है उन उच्छारन से हमारे चोटी मोटी इदर उदर की जो आसक्तियां थी वो खतम हो गई है हमारा शिव संकल्प बढ़ गया है सादक आप इसका अनुभव करेंगे आप याद करें हाँ से सत्तर दिन पहले हम कोई काम को करने के लिए अगर शुरू करते थे तो आदे में ही छोड़ के भाग जाते थे या सत्तर परसंट पे अपने मन को समझा लेते थे यह इतना ही ठीक है इससे आगे जाने की जरूद नहीं है बिल्कुल ठीक है एकड़म हो गया काम मेरा � लेकिन अब नहीं है अब जैसे हम अपनी किसी कारे को उठाते हैं तो उसको अपने आपश हमारा शिवसंतल्प जो है वो उसको पूर्ण करा देता है और अन्त में जो सबसे बड़ा हमारे अंदर बदलाव आया है वो है भक्ती का फूटना हमारे अंदर अपने आप एक भक्ती जागी है भक्ती के कोई भी अकार हो जगता है हम सगुन निर्गुन एक विराट रूप कूल देवता अपना देवता और किसी भी रूप में हम उस परमपिता परमात्मा उस परमेश्वर के प्रती अपनी भक्ती को जागरित होने का भी अनुभव करते हैं हमारा ध्यान और प्रगाड हो जाता है और हमारे करम बंदन कतम हो जाते हैं करम हमारे पूरे हो जाते हैं तो हमारे अंदर एक भक्ती का जागरन होता है भक्ती का जागरन होता है और ये भक्ती इस 70 दिन के अनुभव स्थान में हमारी एक प्रेर्णा का स्रोत्र है हमारी भक्ती में भय नहीं है हमारी भक्ती में प्रेम है हमारी श्रद्धा बढ़ गई है हमारी भक्ती में श्रद्धा है श्रद्धा से संपूर्ण बिलकुल अपने आपको भगवान को समर्पन करके श्रद्धा से समर्पन करके हम भक्ती के प्रती अगरसर हो गए है समर्पन भी बढ़ा है और भक्ती भी बढ़ी है और श्रद्धा भी बढ़ी है और इन सब के बढ़ने से हमारी एकागरता भी बढ़ी है और अगर हम इन सब को सम्मिलित कर ले तो हमारा सुभाव भी बढल गया है हम और भी ज़्यादा भक्ती के तरफ अगरसर हो गए है हमारे कारे और करम जो है वो सब पूरे हो गए है तो इन साथ,
अट,
नौ,
दस आइटम जो मैंने बताई है इनके उपर अगर हम ध्यान दें तो हमारे अंदर एक परिवर्तन आया है ये मुल्यांकन करें और इस मुल्यांकन के बाद हम अपना ध्यान करें तो आज अपना ध्यान आईए एक बार फिर करते हैं और मैं केवल पहुत थोड़ा गाइडन्स दूँगा पेराग्राफ का एडिंग बताऊंगा आप उसको आगे अपनी लय में,
अपनी श्रधा में,
अपने आनंद में बिलकुल दूब के समर्पन के साथ ध्यान करें और � इसी ध्यान को आप जहां तक अपनी जितनी भी ध्यान की को प्रगाड करना है उतना अपने साथ अपने जीवन में करते रहें और आगर आप मेरे इस चैनल को जरूर्ड सब्क्राइब कर लें क्योंकि अभी एक महिने का हम चार हफ्ते का विश्राम करेंगे और उसके बाद यहां से एक और पादान उपर चड़ेंगे हम एक और पादान उपर चड़के कुछ और विचारों को साजा करेंगे जिस से कि हमारी भक्ती शक्ती और हमारी कारे करने की शक्ती हमारी एकागरता हमारा सुपाव जो है वो और भी सौमे और मधर हो जाये तो हम हम शुर तीन बार लंबा सा सांस ले के छोड़ दे और अपने शरीर को स्थिर कर लें कंदों से शुरू करें कंदे की नसे ढीली ढीली ढीली गर्दन की नसे ढीली ढीली ढीली गंपटियों की नसे ढीली ढीली ढीली मस्तक की नसे ढीली ढीली ढीली पूरा मस्तक शान सिर का सारा बोजा समाल दोनों भुजाएं ढीली ढीली ढीली कोनियों के जोड ढीले ढीले दीले कलाईयों के जोड ढीले ढीले दीले पूरी पीट शान शान शान दोनों कुले ढीले ढीले ढीले दोनों जंगाएं ढीली ढीली ढीली कुछनों के जोड ढीले ढीले एडियों के जोड ढीले ढीले दोनों पैल ढीले ढीले ढीले पूरा शरीर स्थिर पूरा शरीर शान साधक अंदर सजग साधक अंदर साधान साधक अंदर उपस्थे अब अपनी लय से अपने श्वासों को नियंत्रन में करें और उनको छोटा छोटा अलका अलका धीमा धीमा करें बाही नासिका से सांस अंदर लेके जाए मोड पे मोड से गर्दन गर्दन से फेप्डे फेप्डों से नाभी और अब अपना पूरा ध्यान नाभी के अंदर आने और बाहर के उपर केंद्रत करें सभी विचार शान्त शान्त शान्त सभी कल्पनाएं शान्त शान्त शान्त सभी स्मृतियां शान्त शान्त शान्त स्मृतियों का विष्ण धोकर मस्तिश के पिछले भाग में दकेल दें स्मृतियों की उर्जा को रक्त में खुलने दें खुल गई खुल गई खुल गई शरीर पोषित हो गया हो गया हो गया ओम का उचारन करेंगे अपनी लय से अपने ओम में अनहद नाद को ढूरने की कोशिश करेंगे साथक ध्यान करें क्या मैं पैर हूं नहीं पैर मेरे हैं क्या मैं हात हूं नहीं हात मेरे हैं क्या मैं तांगे हूं नहीं तांगे मेरी हैं क्या मैं भुजाऊं हूं नहीं दोनों भुजाएं मेरी हैं क्या मैं पेट हूं नहीं पेट मेरा है क्या मैं मस्तिष्क हूं नहीं मस्तिष्क मेरा है क्या मैं बुद्धी हूं नहीं बुद्धी मेरी है क्या मैं मन हूं नहीं मन मेरा है क्या मैं विवेख हूं नहीं विवेख भी मेरा है मैं कौन हूं पातक विचार करें मैं कौन हूं मैं ओम हूं मैं ओम हूं ओम का उचारण मेरे अपने अस्तित्व के सत चित और आनंद से मिश्रत है मैं इस शरीर में ओम का वास हूं मैं इस शरीर में उस परम पिता परमात्मा की एक आत्मा हूं जिसने के शरीर का उपर अपने उपर जिसने शरीर को अपने उपर धारन कर लिया और मैं वो ओम हूं आ ओम ओम जब भी मैं ओम का उचारण करता हूं तो मेरे सभी विचार जो हैं वो शांत हो जाते हैं और ओम के उचारण में मैं अपनी आत्मा से सबसे निकट का मेरा साक्षातकार हो जाता हैं मैं ओम हूं मैं ओम हूं मैं ओम हूं मैं ओम हूं मैं ओम हूं साथ धीरे धीरे शरीर बोत पराप्त करें पेरों की उंगलियां हिलाएं हाथ की उंगलियां हिलाएं और आकें खोल ले सथ चित अनन्द मैं ओम हूं प्रसादक हमारी यात्रा यहीं तक आप में से किसी को भी यदि इस यात्रा को और आगे पढ़ाना है तो मैंने अपना इमेल आईडी इस कमेंट बॉक्स में लिखा है आप कृपया मेरे को इमेल पे अपनी डिटेल्स भेज दे और अगर आपको जरुत है किसी साथना की तो मैं अलग से भी एक साथना का सेशन आपके साथ एक दो दिन का विशे अनुसार और बिल्कुल फोकस्ट वे में आपके साथ ले सकता है और अदर्वाईस हम इस इसी श्रंक्ला में एक नई कड़ी जोड़ेंगे जिसमें हम इससे भी आगे चलेंगे और अब हम शिव सुरूप और शिव भक्ति को आत्मसात करेंगे हम शिव भक्ति को आत्मसात करेंगे शिव से रिलेटेट जितने भी विचार हैं उन सबको मैं सांजा करूँगा और हम अपनी साधना में शिव सुरूप को लेके आएंगे अभी कि ये जो हमारी प्रारम्बिक ये प्रारम्बिक प्रारम्बिक प्रारम्बिक प्रारम्बिक प्रारम्बिक प्रारम्बिक प्रारम्बिक प्रारम्बिक प्रारम्बिक प्रारम्बिक प्रारम्बिक प्रारम्बिक प्रारम्बिक प्रारम्बिक प्रारम्बिक प्रारम्बिक प्रारम्बिक प्रारम्बिक प प्रारम्बिक प्रारम्बिक प्रारम्बिक प्रारम्बिक प्रारम्बिक प्रारम्बिक प्रारम्बिक प्रारम्बिक प्रारम्बिक प्रारम्बिक प्रारम्बिक प्रारम्बिक प्रारम्बिक प्रारम्बिक प्रारम्बिक प्रारम्बिक प्रारम्बिक प्रारम्बिक प्रा That's it.
So sadhak,
आप सबका बहुत बहुत धन्यवाद.
मुझे आशा है आप सबकी साधना प्रगाड हुई होगी और सुभाव में तो निष्चे ही परिवर्तन आया है.
शिवसंकल्प बढ़ा है,
सहेंशीलता बढ़ी है,
एकागरता बढ़ी है,
सुभाव में परिवर्तन आया है.
ठीक है सर्ज,
ये एक बहुत बढ़ा परिवर्तन है,
हमने एक बहुत बढ़ा अनुष्ठान आज समाप किया है,
ईश्वर कृपा हम पे है,
और अब हम इस सेशन क को यहीं मैं समाप्त करता हूँ,
सादक आपका बहुत बहुत धन्यवाद,
ओम ही सत्य है,
ओम ही सत्य है,
ओम ही सत्य है,
धन्यवाद सर्ज.