
How To Find True Peace? Bhagavad Gita Teaching
by Raman Mittal
In this talk, Raman Mittal explores a timeless insight from the Bhagavad Gita (Chapter 5, Verse 21), gently pointing to where true peace and happiness arise. We often seek happiness through experiences, people, or changing situations. But as these shift, the sense of peace they bring tends to fade. This reflection invites you to look a little deeper. It suggests that peace is not something created externally, but something already present within — quiet, steady, and not dependent on circumstances. इस प्रवचन में रमन मित्तल भगवद गीता (अध्याय 5, श्लोक 21) के माध्यम से समझाते हैं कि असली खुशी और शांति आखिर मिलती कहाँ है। हम अक्सर सोचते हैं कि खुशी बाहर मिलेगी — लोगों से, चीज़ों से या जब हालात हमारे हिसाब से होंगे। लेकिन ये सब बदलता रहता है, इसलिए उससे मिलने वाली खुशी भी ज़्यादा देर नहीं टिकती। असल में शांति बाहर नहीं, हमारे अंदर ही होती है। बस हम उसे बाहर ढूँढते रहते हैं।
Transcript
नमस्ते I just felt like talking about one of my most favorite verses of Bhagavad Gita बहुती प्यारा शलोक है,
बहुती घहरा शलोक है तो पहले मैं एक बार उसका हिंदी में और English में translation करके बताता हूँ और फिर उसके बारे में हम चर्चा करेंगे के वो शलोक किस तरफ इशारा कर रहा है तो शलोक कुछ ऐसा है,
Chapter 5,
Verse 21 जो मनुश्य भारी विश्यों,
यानि के इंद्रियों के सुख में आसक्त नहीं हुता वहे अपनी भीतर की आत्मा में जो सुख है उसे अनुभव करता है ऐसा व्यक्ति जो ब्रह्म में स्थित है वहे अविनाशी,
ना समाप्त होने वाला सुख पराप्त करता है और इसका English translation हुआ वहे अपनी भीतर की आत्मा में जो सुख है उसे अनुभव करता है ऐसा व्यक्ति जो ब्रह्म में स्थित है सुख पराप्त करता है जो भारी विश्यों से आसक्त नहीं होता है क्या मतलब हुआ इन बातों का,
किस ओर इशारा कर रहे हैं आपका ध्यान,
आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपक आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपक आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपक आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपका आपक होगा तो क्या है बेटर इट काण्ड बी एक्सप्लेइंड बट लेट्स डू सम्थें टू एक्शूली एक्स्पेरियन्स इट कैन यू ब्रिंग यूर अटेंशन टू जस्ट यूरसेल्फ अपनी होने के हिसास को आप महसूस कर सकते हैं जस्ट होना क्या आप जिन्दा हो अब इस होने को अगर आप ढूंड रहे हो आकरितियों में किसी फॉर्म में किसी मेंटल इमेज में तो ये सिर्फ एक मेंटल कोंसेप्ट रह जाएगा आपको कैसे पता कि इस समय आप सपना नहीं देख रहे हैं जागे वे हो कैन आप आपको पता कर सकते हैं एक होने का हिसास और उस होने के हिसास में एक गहरी शानती और ये शानती ये होने का हिसास बाहर की किसी परिस्थिती कुछ पाने या ना पाने पर डिपेंड़ेंड नहीं है ये है हमेशा छुप जाती है क्योंकि मैं मन की आवाज बाहर के विश्यों पे विश्यों में सुख ढूंढता रहता हूं खोशता रहता हूं भागता रहता हूं ढूंढता रहता हूं चानने की कोशिश करता हूं समझने की कोशिश करता हूं विचारों में और विचारों में इसे समझा नहीं जा सकता क्योंकि इसका कोई फॉर्म ही नहीं है इट इस फ� नग नहीं निराकार निरगुण इट लेक स्पेस आकाश अब आकाश को हम आकरिती में अगर ढूंडने लगे किसी फॉर्म में तो नहीं मिलेगा बट वी केंट फील इट स्टिलनेस इंसाइड अस और ये स्टिलनेस हमारी मन के शोर में बस चुप चाती है कहीं जाती नहीं है सिर्फ दिखाई नहीं पड़ती तो जो व्यक्ति स्टिलनेस में बस आराम विश्राम ना कहीं जाना ना कहीं पहुंचना और शांती आगई वे है जो अपने भीतर की आत्मा में जो सुख है उसे अनुभव करता है जो अपने अंदर के ब्रहम में स्थित है वो इस सुख को प्राप्थ होता है जस्ट बींग कनेक्टेट टू आर बींगनेस विचारों से परे विचार है भावनाएं भी है सेंसेशन्स भी है सेंसरी एकस्पेरियेंस भी है पर अगर मैं इस सुख कर सकता हूँ जिसका कोई रूप नहीं जिसका कोई रूप नहीं जिसका कोई रूप नहीं जिसका कोई रूप नहीं जिसका कोई रूप नहीं बाकि सब कुछ शन भंगुर इंपरमनेट वेहे अविनाशी ना समाप्थ होने वाला सुख प्राप्थ होता है सो मैंने अगर आपको मौका लगे जब भी आपको मौका लगे बस आखे मूंदी या ना भी मूंदी प्राप्थ होता है जब आपको मौका लगे बस आखे मूंदी या ना भी प्राप्थ होता है जब आपको मौका लगे बस आखे मौंदी या ना भी प्राप्थ होता है जब आपको मौका लगे बस आखे मौंदी या ना भी प्राप्थ होता है जब आपको मौका लगे बस आ आखे मौंदी या ना भी प्राप्थ होता है जब आपको मौका लगे बस आखे मौंदी या ना भी प्राप्थ होता है जब आपको मौंदी या ना भी प्राप्थ होता है जब आपको मौंदी या ना भी प्राप्थ होता है जब आपको मौंदी या ना भी प्राप्थ होता होने का हसास और ध्यान घट जाता है ब्रहम घट जाता है शान्ती घट जाती है तैंक ये सो मच
Meet your Teacher
More from Raman Mittal
Related Meditations
Related Teachers
Trusted by 36 million people. It's free.

Get the app
