प्रणाम साधक आज की साधना शुरू करने से पहले दो अवश्यक दूचना है नमबर एक चैनल को कृपया सब्सक्राइब कर ले और बेल आइकन दबादे जिससे आपको नोटिफिकेशन्स टाइम से पहुँचे दूसरा एक सुझाव आया है कि हम इस मेडिटेशन का टाइम सुभे साध की बजाये साधे साध करने आप अपनी राय चैट पॉक्स में लिक्के दे दे उसके नसार आपको पहले से आपको नेक्स्ट मेडिटेशन सेशन जे पहले अगर चेंज करना है तो बता ले आज की करवाई शुरू करते हैं एक लंबा सा सांस ले के छोड़ दे ध्यान रहे एक हमारे मन का हमारे सांसों पे और हमारे सांसों का हमारे मन पे अधिकार होता है जब हम सांसों को नियंतरित करते हैं तो हमारा मन नियंतरित हो जाता है और जब हम मन के विचारों को विवस्थित करते हैं तो हमारी सांसें भी विवस्थित हो जाती है विवस्थित सांसों से जब हम अपने मन और सांसों का और विचारों का मन से इकठा तीनों का परस्पर एक दूसरे का हम परिशकार करते हैं तो हम एक ऐसी अवस्था में पहुँँ जाते हैं जहां ना मन होता है ना विचार होते हैं केवल श्वास होती है और हमारी अवेरनेस उस श्वास से भी निकल के पिर अवेरनेस हो जाते हैं और जब उस अवस्था में हम पहुँँ जहां पे मन और विचार जिसको कहते हैं निरविचार और महाशुन्य हमारे अंतरिक अवस्था में जब निरविचार और महाशुन्य आ जाते हैं तो हमको आनन्द और बहुत शान्ती की अनुभूती होती है आनन्द और शान्ती की अनुभूती यह उपरी सतय पर होती है इसके अंदर हमारी जागरित सत्ताय जो है वो जाग जाती है हमारी सुत्त शम्ताएं हमारे अंदर जो क्रियेटिविटी है जो हमारे अंदर एनर्जी भरी हुई है वो सारी एनर्जी उस अवस्था में जागती है तो अगर हम सान्सों से शुरू करें हम सान्सों को नियंत्रित करते हैं ओम का उच्छारन करके हम मन को नियंत्रित करते हैं और फिर जब हम ओम का उच्छारन भी छोड़ देते हैं तो हम अपने ध्यान से उस अवस्था में जाने की कोशिश करते हैं जो निरविचार और महा शुरू करें हम सान्सों को नियंत्रित करते हैं ओम का उच्छारन करके हम सान्सों को नियंत्रित करते हैं और फिर जब हम सान्सों को नियंत्रित करते हैं तो हम सान्सों को नियंत्रित करते हैं और फिर जब हम सानसों को नियंत्रित करते हैं तो हम सानसों को नियंत्रित करते तो हमारी पूरी शिंखला का मेरा उद्धेश यही है कि किसी तरह से हम येन,
केन,
प्राक्रेण,
हरेक साधन का इस्तेमाल करते हुए उस अवस्था पे पहुँँझाएं जहां हम निर्विचार और महाशुनिक से अवगत्थ हो जायें,
हमें उसका एक्स्पीरियंस हो जा शान्ती और आनन्द यह तो हमें मिलता है,
यह तो अभी मिलना शुरू हो गया है,
लेकिन हमने इससे आगे बढ़ना है,
तो आएये अब हम इस अपना आज का ध्यान लगाने का कारेकरम शुरू करते हैं हलके हलके से अपनी आँखे बंद कर लीजिये,
आँखे बिल्कुल बंद और अपने बाए हाथ के उपर अपना दाईना हाथ रखके अंगूठों को ऐसे जोड के इसको अपनी गोध में रख ले,
बिल्कुल अराम दे पुजिशन में बैठ जायें,
कोई चिंता नहीं है,
कोई विचार नहीं है,
इस मेडिटेशन सेशन के बाद क्या करना है,
उसके बारे में कुछ भी सोचना नहीं है,
बस शर्णागती और समर्पन,
सम-अर्पन,
अपने आपको इस ध्यान में समर्पन कर दो,
इस ध्यान में समर्पन कर दो,
इस ध्यान में समर्पन कर दो,
इस ध्यान में समर्पन कर दो,
इस ध्यान में समर्पन कर दो,
इस ध्यान में समर्पन कर दो,
इस ध्यान में समर्पन कर दो,
इस ध्यान में समर्पन कर दो,
इस ध्यान में समर्पन कर दो,
इस ध्यान में समर्पन कर नाभी को अंदर से चू जाता है,
नाभी तक लेके जाना है लंबा सानस,
एक बर फिर छोड़ दें,
एक बर फिर छोड़ दें,
एक बर फिर छोड़ दें,
वो अपना सानस को बिल्कुल हलके हलके अपने आप चलने दें,
और अपना सारा ध्यान अपने कंधों पे ले आए,
कंधों के मसल्स एक दम धीले,
धीले,
धीले,
गर्दन के नसे एक दम धीली,
धीली,
धीली,
कनपटियों की मास पेशिया एक दम धीली,
धीली,
धीली,
माते का पूरा मस्तक एक दम धीला,
धीला,
धीला,
पूरा सिर एक दम शाल,
कंधे,
गर्दन और सिर से सिर का सारा बोज़ा समात,
कोई बोज़ा नहीं है,
ना हमारे कंधों पे,
ना सिर पे,
एक दम शाल,
पूरे पीठ के मसल्स शाल,
एक दम धीले,
धीले,
धीले,
दोनों बाज़वे एक दम धीली,
धीली,
धीली,
कोनियों के जोड धीले,
धीले,
धीले,
कलाईयों के जोड धीले,
धीले,
धीले,
दोनों लाते एक दम धीली,
धीली,
धीली,
कैरों के जोड धीले,
धीले,
साधक एक दम शाल,
साधक सजग,
साधक शाल,
साधक सजग,
साधक शाल,
शानती एक दम शानती,
और कुछ भी नहीं,
केवल शानती,
निरविचार,
साधक निरविचार,
साधक निरविचार,
साधक शाल,
शाल,
शाल,
असीम परम शानती,
एक दम शानती,
चान,
चान,
श्वास एक दम सहच,
बहुत धीमा,
धीमा श्वास,
असीम परम शानती,
असीम परम शानती,
असीम परम शानती,
असीम परम शानती,
असीम परम शानती,
असीम परम शानती,
असीम परम शानती,
असीम परम शानती,
असीम परम शानती,
असीम परम शानती,
असीम परम शानती,
असीम परम शानती,
असीम परम शानती,
असीम परम शान और पूरे ओम का गुञ्जन हमारे सिर में,
सिर के एकडम उपर जिसको ब्रह्मरंद कहते हैं,
वो एक एक रुपए के सिक्के के साइस का एक गुला होता है,
बिल्कुल सिर के उपर,
जब चोटे बच्चे का सिर पे हाथ थकते हैं,
वहाँ बहुत ही हल्की हल्की सी हमको सूर् वस उस जगापे हमने म का गुञ्जन वहाँ पे डारेक्ट करना है,
ओम का उचारण शुरू करते हैं,
लंबा सा सांस लें,
मेरे उचारण और आपके उचारण में थोड़ी समानता आ सकती है,
वो केवल शुरू करने के समय और खतम करने के समय पे होगी,
आप अपने तरीके से कर लें और इस चीज़ पे ध्यान ना दें कि ओम का उचारण मेरे साथ ही करना है,
हम ओम बोलते हुए बीच में भी आपस में मिल सकते हैं,
जब हमारा आपस में मिलेंगे तो आपके उचारण और मेरे उचारण के बीच में एक रेजोनेंस होगी,
हमें उस रेजोनेंस पे ध्यान देना है,
शुरू और अंत पे नहीं देना,
मद्ध की रेजोनेंस पे ध्यान देना है,
उसी से हमारे मन में शान्ती और आनंद की उप अनुभूती करें,
विचार करें,
कल्पना करें के आप एक जंगल में पकडंडी पे जा रहे हैं,
बहुती अच्छी सर्दियों आप आगे चलते जा रहे हैं,
और आपके सामने एक बहुत सुन्दर पकडंडी पे जा रहे हैं,
पकडंडी पे जा रहे हैं,
पकडंडी पे जा रहे हैं,
पकडंडी पे जा रहे हैं,
पकडंडी पे जा रहे हैं,
पकडंडी पे जा रहे हैं,
पकडंडी पे जा रहे हैं,
पक� पकडंडी पे जा रहे हैं,
पकडंडी पे जा रहे हैं,
पकडंडी पे जा रहे हैं,
पकडंडी पे जा रहे हैं,
पकडंडी पे जा रहे हैं,
पकडंडी पे जा रहे हैं,
पकडंडी पे जा रहे हैं,
पकडंडी पे जा रहे हैं,
पकडंडी पे जा रहे हैं,
पकडंडी पे ज पानी जो है वो आपके मैंड में आ गया है,
आपके सिर में आ गया है,
दूसरे लेवल की ये इमैजिनेशन है,
एक कलपना के भीतर दूसरी कलपना,
पानी जो आपके मस्तिश्क में आ गया है,
वो एकदम शान्त कर रहा है,
आपके अंदर की सभी जौला अगनियों को शान्त कर रहा है,
जितने भी क्रोध के अंकुर फुट रहे थे,
उन सब को शान्त कर रहा है,
वो शीतल जल,
वो शीतल जल आपके अंदर दूनों कानों के बीच का जो इलाका है,
उसको शान्त कर रहा है,
एकदम शान्त,
कोई भी विचार उठ नहीं रहा,
केवल इस कल्पना की शान्ती जो है,
वो मन को मिल रही है,
और शान्ती के बीच में आपके नीचे दिल से उपर को एक आनंद की सफुर्णा उठ रही है,
आनंद,
परम आनंद,
इस कल्पना को और प्रगाड करें,
तलाब का जल हलका हरा और नीले रंका,
और वो ही तलाब का जल आपके मस्तिश्क में हलका और नीले रंका,
और उसने सारी क्रोधागनी उसको समाप्त कर दिया है,
सारी कामनाओं को समाप्त कर दिया है,
सारी पैशन्स को समाप्त कर दिया है,
मन एकदम शान्त है,
कुछ भी विचलित नहीं है,
कोई भी विकार मन में नहीं आ रहा,
एकदम शान्त,
मन शान्त,
साधक एकदम सजग,
विचार आते ही उसको मैं उसका मुल्यांकन करूँगा,
सजग,
शान्ति में साधक सजग,
कोई विचार आएगा,
तो मैं उसका मुल्यांकन करके,
उसके एक लेबल लगाके,
उसको साइड पर रखतूँगा,
विचारों का फूटना बंद,
बिल्कुल बंद,
साधक सजग,
साधक सजग,
धीरे धीरे ध्यान से बहाराएं,
शरीर बोत प्राप्त करें,
सबसे पहले अपने पेरों की उंग्लियों को बहुत हलके,
हलके से हिलाएं,
बहुत हलके से हिलाएं,
और जो हीट पैदा हो रही है,
गरम जो हाथ हो रहे हैं,
उससे अपने मुफ़े लगा,
थीरे से आँखें खोल ले,
ये जो परमशांती की अनुभूती है,
ये सिर्फ पहला सत्थ ही चरन है,
इससे बहुत आगे की सूख्षिम सत्थाएं हमारा इंतजार कर रहे हैं,
आज के लिए इतना ही,
कल सुबह फिर आपके सुझाव अनुसार साथ बज़े या साड़े साथ बज़े,
वो आपके सुझाव अनुसार होगा,
वो आपको मैं इंडिकेशन देते हूँ,
आज के लिए इतना ही,
ओम ही सत्य है,
ओम ही सत्य है,
ओम ही सत्य है,