
बस शरीर रूपी कपड़ा बदला है : आत्मा तो अमर है
by BK Shaifali
जब किसी प्रियजन के चले जाने पर मन अस्थिर हो, तब इस अनुभूति से आत्मा की अमरता को स्वीकार कर शांति और जुड़ाव का अनुभव किया जा सकता है। यह अनुभूति आपको गहरे स्तर पर यह स्वीकार करने में मदद करती है कि जीवन और मृत्यु केवल शरीर के स्तर पर होते हैं — आत्मा न तो जन्मती है, न मरती है। "बस शरीर रूपी कपड़ा बदला है" यह समझते ही आप अपने प्रिय की ऊर्जा को, उनके प्रेम को, अपने चारों ओर महसूस कर पाते हैं। इससे भावनात्मक हीलिंग होती है, मन हल्का और स्थिर हो जाता है। आत्मा की निरंतरता का यह ज्ञान आपको डर, शोक और बिछड़ने की पीड़ा से मुक्त कर, एक नई आत्मिक समझ और आंतरिक शांति प्रदान करता है। जीवन की गहराई और आत्मा के वास्तविक स्वरूप से जुड़ाव स्थापित होता है — ओम शांति।
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