उम शानती वैसे हम अच्छी तरह से चल रहे हैं हमारा रूटीन रेगुलर वो शुरू है और ऐसे इसमें कोई आपको कहता है मुझे ना आपसे बात करनी है,
मुझे ना आपको कुछ बताना है और जब मिलते हैं तब वो कहते है मालूम है वो आप के बारे में क्या-क्या बोल रहे थे उन्होंने आप के बारे में ये सुनाया,
ये सुनाया आप कितने गालत हो,
आप ये हो,
वो हो अभी अब तक तो हम शानत है अब तक मन बड़ा खुश था,
मन बड़ा अच्छा था ओके,
अभी क्या हो गया उनकी बाते सुनते सुनते उनके प्रभाव में आ जाते हैं और फिर हम चिंतन करना शुरू कर देते हैं,
सोचना शुरू कर देते हैं अच्छा,
उन्होंने ऐसी कहा फिर हम कहते हैं बराबर,
वो है इऐसे,
उनके अंदर भी ये गलती है,
वो गलती है और फिर ये सोचते हैं,
आकिर मैं कब तक ये सहन करो,
इनका इतना करने के बाद भी मैं सहन कहा तक करो भाई आकिर हम भी तो इंसान है,
हमारे से गलती हो गई,
अगर कुछ हो गया,
तो उन्होंने आकर तो बोलना चाहिए था न लेकिन नहीं,
जैसे हमने उनसे अपने बारे में सुना,
ऐसे तो हमारे मन की शांती खतम हो गई और फिर हम दूसरों को भी वो कथा सुनाते हैं,
कि वो कैसे है,
उन्होंने क्या-क्या किया था,
कितना गलत बोला था,
गलत किया था अभी क्या शुरू हो गया,
हमने व्यर्त बोलना शुरू कर दिया,
अच्छा ये जो व्यर्त बाते होती है न,
उन्होंने मेरे बारे में सुनाया,
और मैंने उनके बारे में औरों को सुनाया तो ये सारा क्या शुरू हो गया,
व्यर्त,
चंतन,
व्यर्त,
वर्णन,
और ये जो व्यर्त बाते होती हो बड़ी चटपटी होती है,
बहुत,
जैसे चटपटी चीजे होती है न,
बड़ी मज़ेदार लगती है,
कटी मिटी होती है,
बड़ी अच्छी लगती है न,
अगर कोई फीका खाना होगा,
सादा भूचन होगा,
तो अच्छा नहीं लगेगा,
लेकिन ये चटपटी चीजे तो बड़ी अच्छी लगते हैं,
और ये ऐसी बाते सुनते सुनते फिर पूचेंगे,
अच्छा बताओ,
फिर आगे उन्होंने और क्या बोला,
और क्या बोला,
तो संसकार मालूम है,
कौन सा बन जाता है,
व्यारत बाते सुनना,
व्यारत चिंतन सुनना,
बोलना,
व्य फिर सोचते हैं,
अरे हम तो नहीं चाहते थे,
लेकिन उन्होंने सुनाया ना,
तो फिर मैंने भी सोचा,
अच्छा चलो देखे ते सुई,
कि वो क्या सुना रहे है,
वो उनको दिल खाली करना था मेरे पास,
तो उन्होंने सुना दिया,
अरे लेकिन उनकी दिल तो खाली हो ग� और फिर वो थोड़ा थोड़ा हमारे दिल में भरते भरते,
फिर हमारा संसकार बन जाता है,
और वो संसकार कौन सा,
दूसरे के बारे में व्यर्त बोलना,
अपनी शुब सोच को खतम करना,
अपनी पॉजिटिविटी को खतम करना,
व्यर्त बातों में इंट्रे कर रहे हैं,
और हम भी ये करना शुरू कर देते हैं,
फिर हमारी उसके बाद नरणई शक्ति काम नहीं करती है,
कि हम रोंग कर रहे हैं,
ये राइट कर रहे हैं,
ये शक्ति हमारी नष्ट हो जाती है,
और फिर हमारा मन इन व्यर्त से बढ़ा रहता है,
तो हम संतुष्ट नहीं रहते हैं,
अक्शल में क्या करना चाहिए,
उनकी बातों से अपने मन को बढ़ दिया,
मन पहले खाली था,
अरे मुझे जीवन में कहा जाना है,
मुझे तो आगे बढ़ना है,
मुझे इस जीवन में बहुत कुछ स्रेष्ट कार्य करने है,
तो फिर कौन से व्यर्त बातों में हम फस गए,
जिसको जो कहना है,
कहने तो,
मैंने क्या याद करना है,
मैंने कैसे अपनी मन के स्थिति को बहुत अच्छा रखना है,
मैंने अपने मन के शक्ति को कैसे बढ़ना है,
मन के शक्ति को अगर मुझे बढ़ना है,
तो बस एक बात याद रखो,
जो भी कोई कुछ भी कहे,
वो उनकी अपनी सोच,
उनकी अपनी understanding,
उनका अपना संसकार है,
तो ठीक है,
ड्रामा में उनका पार्ट है,
मुझी क्या सोचना है,
जिससे मैं सदा खुश रहो,
Simple,
अपनी सामने सिर्फ याद लाओ,
सिर्फ याद करो,
इस जीवन में,
मैं आत्मा कि इतनी blessed हूँ,
I am so much blessed,
I am blessed that God is in my life,
मैं जिन्दगी में बहुत खुश हूँ,
क्योंकि भगवान मुझे मिला है,
मुझे भगवान ने क्या-क्या blessings दिये,
इस जीवन में याद करो,
देखो हमारे में कौन-कौन सी गुण है,
जड़ा याद करो,
कौन-कौन सी गुण है मुझमें,
कौन-कौन सी विशेश शक्तियां है,
मेरे में हो सकता है मधूरता का गुण,
महनत करने का गुण,
Very perfectionist,
Accurate,
बिगडी को सुधार करने वाले,
Creativity,
ऐसे कितनी सारे गुण है,
उसे याद करो,
उसके साथ याद करो,
मेरे में कौन-कौन सी शक्तियां है,
मेरे में कौन-कौन सी शक्तियां है,
हम लोगों की बातों को पकड़कर नहीं बैठते,
दुसरों के साथ आजिस्ट कर लेते हैं,
सबको सईयोग देने की शक्तियां है,
सहन करने की भी शक्तियां है,
तो होबलेस टाइम,
सिर्फ याद करो,
कि परमात्मा ने मुझे इस जीवन में क्या-क्या दिया है,
देखो,
कई बार कहते हैं न,
भगवान की दया से,
मुझे ये मिला है,
ये मिला है,
हमाला घर अच्छा,
हमारे परिवार के सदस्य अच्छे,
उनका सब अच्छा,
मेरी हल्त अच्छी,
सबकी हल्त अच्छे,
अच्छा सोचते हैं,
ये सारी उसके ब्लेसिंग्ज न,
उस ब्लेस करो,
अब मुझे मेरी इस जीवन से दुआएं कमानी है,
मेरी एक एक सोच से दुआएं कमानी है,
एक एक बोल से दुआएं कमानी है,
एक एक कर्म से दुआएं कमानी है,
तो मेरा समय कितना अमुल्य है,
मेरा ये जीवन कितना सुरिष्ट है,
तो ये जीवन,
अब मुझे सिर्फ और सिर्फ दुआएं कमाने में लगाना है,
तो जिसने जो भी बोला,
जो भी कहा,
उनको भी बहुत सारी दुआएं,
दुआएं,
ब्लेसिंग्ज,
उनका भी अच्छा हो,
उनका भी बला हो,
उनका सबकुछ अच्छा हो,
उनका और मेरा रिष्टा बहुत अच्छा हो जाएं,
बहुत अच्छा हो जाएं,
तो जब हम इस प्रकार से सोचना शुरुग करेंगे,
मुझे क्या मिला है,
तो इन सारी बातों से,
व्यर्त बातों से हमारा मन हट जाएगा,
और ये प्राप्तियां सोचने से हमारा मन शक्ति शाली बनेगा,
सदा मन प्रसंद रहेगा,
और जिसका मन प्रसंद,
उसका चेहरा भी प्रसंद रहेगा,
और उनकी प्रसनता के वाइब्रेशन से,
जो जो उनके सम्मन संपरत में आएंगे,
सारे खुश हो जाएंगे,
प्रसंद हो जाएंगे,
हाप्पी दे.