
जब जीवन रंगमंच लगे, यह ध्यान अपनाएँ
by BK Aditi
जब जीवन के मंच पर बार-बार असमंजस या अपेक्षाओं से घिर जाएँ, यह ध्यान आपको अपने सत्य कर्तव्य की याद दिलाएगा। इस ध्यान के पश्चात व्यक्ति जीवन को एक रंगमंच की तरह देखने लगता है जहाँ हर आत्मा अपना-अपना किरदार निभा रही है। इससे मन में किसी के प्रति शिकायत या अपेक्षा समाप्त हो जाती है और आत्म-कर्तव्य पर एकाग्रता बढ़ती है। यह अनुभूति आत्मा को हीरो-पाट धारी बनाकर सकारात्मक ऊर्जा से भर देती है। परिणामस्वरूप, जीवन सरल, सहज और कर्तव्य-केंद्रित हो जाता है, जिससे आंतरिक शांति स्वतः प्राप्त होती है।
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