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मृत्यु को स्वीकारने की आत्मिक शक्ति

by Bk Vidhatri

Type
guided
Activity
Meditation
Suitable for
Everyone

जब जीवन और मृत्यु के प्रश्न आपको उलझन में डालें और आप आत्मा के अजर-अमर स्वरूप को समझना चाहें। इस ध्यान के माध्यम से मृत्यु और परिवर्तन के भय से मुक्ति मिलती है। शरीर की नश्वरता को स्वीकार कर जीवन को गहरी शांति और सहजता से जीने की शक्ति आती है। आत्मा के अजर-अमर स्वरूप का अनुभव करने से मृत्यु अंत नहीं, बल्कि एक नए आरंभ का एहसास होता है। यह समझ जीवन में साहस, कृतज्ञता और आत्मिक संबंधों की गहराई को और बढ़ाती है

AcceptanceImpermanenceSoul ImmortalityDetachmentInner PeaceSpiritual StrengthSelf Realization

Transcript

ओम शान्ते अपने भागते हुए मन को समिठते हुए थीरे थीरे गहरी सांस के साथ उसे शान्त करते हुए अपने सत्य का अनुभव करें ये दिल जो धड़क रहा है ये आखें जो देख रही है ये चेहरा जिसे देख कर दूसरे मुझे पहचानते हैं ये हाद पाउं जो सारा दिन कर्म करते हैं और ये पूरा शरिण ही जो मेरी पहचान बन चुका है क्या ये हमेशा से ऐसा ही था और क्या ये हमेशा ऐसे ही रहेगा अन्तरात्मा से ये चवाब आ रहा है कि ये सब कुछ टेंपरिरी है जब तक है,

तब तक बहुत अच्छा लेकिन ना तो ये हमेशा से था और ना हमेशा रहेगा इस संसार में जिन जिन को भी इन आखों से देख रहे है ये सब बदलने वाली है जैसे हर वस्तु कभी तो बनाई गई होगी और कभी पुरानी होकर अपनी वैल्यू खो बैठेगी फिर उसकी जगए नई बनाई जाएगी ऐसे ही ये शरीर भी कभी तो बना और कभी इसे बदलना भी होगा मैं इन दोनों ही परिस्थितियों को शान्त पूर्वक देख रही हूँ ये दोनों ही प्रकृति के क्रम के अनुसार अटन है लेकिन एक और अटल सत्य है जो है इस शरीर को चलाने वाली आत्मा अजर अमर अविनाश्यों जो सदा थी अभी भी है और सदा रही की आज एक शरीर में,

कल दूसरे में जिन से हमारा रिष्टा है,

जो हमारे अपने है,

वो शरीर नहीं यही शक्ती है क्योंकि मैं खुद भी ये शरीर नहीं मैं भी अजर अमर आत्मा हूँ,

इसलिए मेरा रिष्टा भी शरीरों से नहीं आत्मा से है जो भी मेरे मित्र संबन्धी,

जिने मैं अपना कहते हूं,

वो सब वास्तब भी कभी ना मितने वाली आत्मा है शरीर तो जब से चनन लेता है,

तब से बदलता रहता है कभी चोटा,

कभी बड़ा,

कभी बीमार,

कभी बुजुर्ग,

तो कभी शक्ती ही हम इस प्रकृति के नियम को तो नहीं बदल सकते,

लेकिन उस शरीर में रहने वाली आत्मा की शक्ती को पहचान कर उसे बढ़ा सकते हैं मैं अपने अस्तित्व को पहचानती जा रही हूँ,

जो भगवान की संतान,

कभी न मिटने वाली आत्मा हूँ मैं सदा थी,

सदा हूँ,

इस सत्य को पहचान कर मैं खुद में भी शक्ते भर रही हूँ और दूसरी आत्माओं को भी इस सत्य को जानने की,

पहचानने की शक्ते दे रही हूँ ओम शानते

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