ओम् शान्ति जीवन के इस पढ़ाओं पर जब सब कुछ अच्छा चल रहा है हस्ता खेलता परिवार है बहुत सक्सेस्ट्रूल प्रोफेशनल लाइफ है अपनी महनत से बनाया हुआ ये घर है समाज में अपनी रिस्पेक्ट है इस सब को अंदर से महसूस करते हुए एक सत्य का विचार मन में आ रहा है ये सब कुछ मैंने जीवन में कमा तो लिया लेकिन क्या ये सब कुछ सादा ऐसे ही रहेगा क्या ये सब कुछ एक दिन मेरे साथ चलेगा जीवन के सत्य को हम सभी जानते हैं फिर भी कही न कही उस सत्य को भूल जाते हैं आज पर्माद्मा को साक्षी मान कर अपने जीवन को देखते हुए इस जीवन से जो मुझ में परिवर्तन आया है उसे देखें ये सारे रिष्टे,
ये सारी उपलब्तिया,
ये संपत्ति ये सब तो मैंने कमाई हूँ लेकिन इसके द्वारा मैंने अपने अंदर आत्मा के कर्मों की कमाई में जो चोड़ा है उसे महसूस करें ये परिवार जिसे मैंने जोड़ा है ये जर्या था मेरे अंदर के प्रेम को सुख को जागरत करने का अगर ये परिवार ना होता तो मैं अपने अंदर के प्रेम की गुण को त्याग की गुण को सुख की गुण को कैसे पहचानती आज अपने परिवार को देख कर उन सब को दिल से बहुत बहुत धन्यवाद करें दुआये दे कि आप मेरे जीवन में आए और मुझे अपने ही प्रेम का त्याग की शक्ति का सुख का अनुभव कराया ऐसे ही अपने इस घर को अरजित की हुई उपलब्दियों को अपनी प्रोफेशनल लाइफ को देखें ये सब भी इस संसार में अपनी एक पहचान बना कर सब की दुआएं लेने का एक जरिया बना जो भी मैंने कर्म किये उससे मेरी जीवन में संतोष शक्ति की वृद्धी हुई ये जरिया बने मुझे मेरी कावलियत का एहसास कराने के लिए मेरी निगाह केवल जरिये पर जा रही थी लेकिन अब मैंने पहचाना कि चितना ये जरिया महत्वपून है इसके द्वारा मैंने क्या पाया वो भी महत्वपून है मेरे जाने के बाद मेरे यही गुण दूसरों को मेरी याद दिलाएंगे एक दिन भले ही इनके बीच में ना रहूं लेकिन मेरे यह कर्म ही मेरी यादगार मेरे यह गुण ही मेरी यादगार इन सब के बीच में रहेंगे इनके चेरों की मुस्कान हमीशा बढ़ती रहेगी जब भी मेरे इस प्रेम के गुण को त्याग के गुण को मेरे दिल से निकली सब के लिए उन दूआओं को यह फिर से याद करेंगे,
महसूस करेंगे आज अपने आप से मैं यह वादा करती हूँ कि ऐसी और भी यादकार हर पल मैं जोडती जाओंगी जो मेरे बाद भी मुझे सबकी दिल में जिन्दा रखेगी सुक्र देती रहेगी मेरे दूर होने पर भी मेरे प्यार का एहसास कराती रहेगी मैं अविनाशी आत्मा उस अविनाशी प्यार के सागर पर्मात्मा से सुक्र के सागर पर्मात्मा से इतना प्यार अपने अंदर भर रही हूँ जो जब तक मैं यहां हूँ में परिवार उस प्यार के सागर सुक्र के सागर पर्मात्मा से मैं इतना प्यार अपने जीवन में भर रही हूँ जो हर पल,
हर संकल्प से,
हर बोल से,
विवहार से,
और कर्म से सब को सुक्र देती रहूं मुझ आत्मा के तरह यह प्यार भी अमर हो जाए यह शरीर,
यह नाम,
यह जीवन रहे नरहे लेकिन यह प्यार की यादगार सदा रहे अनुभफ करें कि सर्वशक्तिवान प्यार के सागर जोतिर बिंदु पर्मात्मा से प्यार की किरने परस रही हैं मेरे उपर,
मेरे पूरे परिवार के उपर,
इस पूरे घर के उपर और मेरे द्वारा जहां जहां भी मेरा संवंद है वहां वहां यह प्यार,
यह स्नेह,
यह सुक पहुँच रहा है और सबके दिलों में पस रहा है