
मैं भाग्यशाली ईश्वरीय संतान हूँ
by BK Aditi
जब जीवन में आत्मविश्वास, भाग्य और ईश्वरीय सहारे की अनुभूति चाहिए, तब यह ध्यान किया जा सकता है। इस ध्यान के अभ्यास से आत्मा अपने भीतर छिपे हुए ईश्वरीय गुणों और शक्तियों को पहचानने लगती है। यह अनुभव यह अनुभूति कराता है कि जीवन में मिलने वाली ईश्वरीय प्राप्तियाँ अनंत हैं और हर कार्य में सफलता का भाव स्वतः जागृत होता है। आत्मा स्वयं को भाग्यशाली, समर्थ और ईश्वरीय संरक्षण में अनुभव करती है, जिससे जीवन में विश्वास और शांति स्थिर हो जाती है।
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