नमस्ते होली सिर्फ रंगो का त्योहार नहीं है। ये है छोड़ने का और फिर से शुरू करने का समय है। आज हम कुछ पुराना छोड़ेंगे ताकि नया सहजता से आ सकें। आराम से बैठ जाएं या यदि चाहें तो लेट जाएं। आखे कोमलता से बंद कर लें। एक गहरी सास अंदर लें और धीरे से बाहर छोड़ लें। फिर से अंदर और बाहर। अपने शरीर को महसूस करें जहां भी हलका तनाग है। उसे पकड़ने की कोशिश न करें। बस जान ले वहें वहां है। अब कल्पना करें आपके हाथ में थोड़ा सा सूखा गुलाल है। इस गुलाल में आपकी कोई एक चिंता,
कोई पुरानी नाराज़गी या कोई अधूरी बात है। उसे पहचाने नाम देने की ज़रूरत नहीं है। बस महसूस करें। अब एक गिहरी सांस ले और सांस छोड़ते समें कल्पना करें। आप वहें रंग हवा में उड़ा रहे हैं। वहें धीरे धीरे उड़ रहा है। हलका हो रहा है और आकाश में विलीन हो रहा है। आपका मन थोड़ा हलका हो रहा है। फिर से सांस ले। इस पार कल्पना करें। उपर से कौमल सुनेरा प्रकाश आप पर बरस रहा है। जैसे आशिरवाद,
जैसे नई शुरुवात। वहें प्रकाश आपके सिर से होते हुए हिर्दे तक पहुँच रहा है। जहां भी खालीपन मना है,
वहें प्रेम से भर रहा है। धीरे से मन ही मन दोहराएं। मैं पुराना छोड़ने के लिए तैयार हूँ। मैं खुद को मुक्त करता हूँ। मैं नई शुरुवाद का स्वागत करता हूँ। कुछ शण बस इस अनुभव में रहें। होली का असली रंग स्वतंतरता है। जब हम छोड़ देते हैं,
तब ही सच में मुस्कुरा पाते हैं। अब अपनी सासों को सामाननी होने दे। अपनी चहरे पर एक हलकी मुस्कान आने दे। एक अन्तिम गहरी सास ले,
शण भर रोकी। और धीरे से छोड़ दे। अपनी हतेलिया गर्म होने तक रगने। और उन्हें अपनी आखो पर रखे। और जब आप तयार हो,
तो धीरे से आखे खोले। इस होली सिर्फ रंगो की नहीं,
मुक्ति से भी खेलिये। आपको हलके,
उजले और शांत मन की शुब कामनाई।