नमस्ते भूली के रंगों में जाने से पहले आईए कुछ पल अपनी भीतर के रंगों से मिलते हैं आराम से बैठ जाएं स्पाइन को एकदम सीधा कर लें शरीर एकदम से धीला आखें कोमलता से बंद कर लें एक गहरी सांस अंदर लें और धीरे धीरे बाहर छोड़ दें फिर से सांस अंदर और पूरी तरहें बाहर होली खुशियों का त्योहार है लेकिन कभी-कभी भीर,
आवाज और भागदोर मन को थोड़ा भारी कर देती है इसलिए आज हम शुरुवात करेंगे इस्तिर्ता से अपनी सांसों पर ध्यान लाए हर श्वास के साथ शांती को भीतर भरे हर नीश्वास के साथ तनाव को बाहर जाने दें महसूस करें आपके कंधे धीले हो रहे हैं चहरा नरम हो रहा है,
दिल की धड़कन संतुलित हो रही है अब अपनी सामने एक रंग की कलपना करें बहुत चमकीला नहीं,
बस हलका,
सुकून देने वाला शायद हलका गुलाबी,
जो प्रेम का प्रतीख है या आस्मानी नीला,
जो शांती का प्रतीख है या फिर कोमल पीला,
जो आनन्द का अन्भव कराता है हर सांस के साथ वेहरंग आपके हिर्दे में भर रहा है और हर सांस छोड़ते समय वेह पूरे शरीर में फैल रहा है होली केवल बाहर नहीं खेली जाती,
उसकी शुरुआत भीतर से होती है अपने आप से धीरे से पूछें,
इस बार मैं कौन सा भाव मनाना चाहता हूं?
शमा का,
कृतग्यता का,
नई शुरुआत का या फिर खुशी का मन ही मन दोहराई,
मैं शांती के साथ उत्सव मनाऊंगा मैं प्रेम से प्रतिकिरिया दूंगा,
मैं हर परिस्थिती में संतुलित रहूंगा अब अपनी सांसों को स्वभाविक होने दें कल्पना करें,
आप होली मना रहें हैं चहरे पर रंग है,
लेकिन मन में गहरी शांती है आप हस रहें हैं,
मिल रहें हैं,
लेकिन भीतर से पूरी तरह स्थिर हैं यही है स्थिरता से उत्सव तक का सफर एक आखरी गहरी सांस ले,
शन भर रोकें,
और धीरे से छोड़ दे अपनी हतेलियों को आपस में रगडें और गर्म होने पर उन्हें अपनी आखों पर रखें जब आप आखे खोलने के लिए तैयार हो जाए,
तब आखे धीरे से खोले इस होली रंग बाहर भी हो और भीतर भी आपको शान्ति और आनंद से भरी होली की शुब कामनाई