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Śrīsūktam | A Chant For Grace And Beauty

by Deb Robertson

Type
talks
Activity
Meditation
Suitable for
Experienced

This chant is in praise of Lakshmi, the of goddess wealth, fortune, power, beauty, fertility and prosperity. In this chant, we ask for her abundant grace for the world and our lives so that we might receive more fortune.

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Transcript

श्री सुख्तम श्री सुख्तम श्री सुख्तम श्री सुख्तम श्री सुख्तम श्री सुख्तम श्री सुख्तम श्री सुख्तम श्री सुख्तम श्री सुख्तम श्री सुख्तम श्री सुख्तम श्री सुख्तम श्री सुख्तम श्री सुख्तम श्री सुख्तम श्री सुख्तम श्री सुख्तम श्री सुख्तम श्री सुख्तम श्री सुख्तम श्री सुख्तम श्री सुख्तम श्री सुख्तम श्री सुख्तम श्री सुख्तम श्री सुख्तम श्री सुख्तम श्री सुख्तम श्री सुख्तम श्री सुख्तम श्री सुख्तम श्री सुख्तम श्री सुख्तम श्री सुख्तम श्री सुख्तम श्री सुख्तम श्री सुख्तम श्री सुख्तम श्री सुख्तम श्री सुख्तम श्री सुख्तम यस्यां हिरन्यं विन्देहं कामश्वं पुरुशानः अश्वापूर्वाम रत्तमत्याम हस्तेनाद प्रभोदेनि यस्यां हिरन्यं विन्देहं कामश्वं पुरुशानः प्रभोदेनि श्रेहं देवि मुपक्व हे श्रीर्म देवि चुष्चताम कांसो स्मिताम हिरन्य चुष्चताम देवि मुपक्व हिरन्य चुष्चताम देवि मुपक्व हिरन्य चुष्चताम देवि मुपक्व हिरन्य चुष्चताम देवि चुष्चताम चंड्राम प्रपासाये यशसाच्वदन्तिम् श्रेहलोके देवजुष्ठामुधाराम् अम्पत्मिनेमिम् शरणमाहम् प्रपाध्ये अलक्ष्मिर्मे नश्चतां त्वां व्रुने आदित्यवार्ने तपसो दिजातु वनस्पतिस्तवा व्रिक्षो तपिल्वा तस्यपलानि तपसा नुदंतु मायं तरायस्च बह्या अलक्ष्मिर्मे उपई दुमान देवसकफ किर्टिष्च मनिनासः प्राजूर्बूतोस्मे राष्ट्रेस्मिन किर्टिम्रदिन् तदातुमे क्षुत्पिपासामाला चेष्टामालक्ष्मिन नाशयाम्याम् अभूति मसाम्रदिन्चसार्वान नेनुदमेक्रहातु गंधद्वारान दुरादाशान नित्ति अपूर्ष्टान कर्येशिनि ईश्वरिः सार्वभूतान तामिहो पक्वः श्रियम् मनसफकामामाकूतिम् वाचसत्यमशेमः पशुनं रूपमनस्यमः श्रेष्रयतय यशा कार्डमेन प्राजबूता मयिसं पवा कार्डमा श्रेहं वासयमेकूले मातरं पत्मामालेनीम् आपश्विजंतु स्निक्तानिचिक्लिता वासमेक्रहे नेचा देविमातरं श्रेहं वासयमेकूले आद्रां पुष्कारेनीम् पुष्टिम् बिंगलां पत्मामालेनीम् चंड्रां हीरन्महीर् लक्ष्मिञ्चातवेडूमः आवाः आद्रां यफकरेनीम् यश्टिम् सुवर्णां हेमामालेनीम् सुर्यां हीरन्महीर् लक्ष्मिञ्चातवेडूमः आवाः तामः आवाः चातवेडू लक्ष्मिमणपगामिनीम् यस्यां हीरन्यं प्रभूतं गावो तर्षोस्वान् फिन्देहं पुरुषानां पात्मप्रिहे पात्मिने पात्महस्ते पात्मालये पात्मदलायताक्षी विष्वप्रिहे विष्णुक्मानूनुकूले त्वादपादपादमं महिसनिदत्सः ओम् श्रिजात श्रिहानिर्याय श्रिहम्वयो जनित्रप्यो तद्धातु श्रिहम्वसानां अम्रतवमयन् बजन्ति साधियस्सवितावितत्युनि श्रिह एवैनं तच्रियमादधाति संततं रचावशत्कृत्यम् संततं संथियति प्रचया

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Deb RobertsonMelbourne VIC, Australia

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