
Murli 6 July 2024
by BK Sonika
बाबा की शिक्षाओं पर एक शांत, भक्तिपूर्ण चिंतन—शांति, स्मरण, और दिव्य गुणों को विकसित करना। नेगेटिविटी को छोड़ दें, मीठा बोलें, और घर की आंतरिक यात्रा पर ध्यान केंद्रित करें। ओम शांति। Image: RAY LEI, Pexels

by BK Sonika
बाबा की शिक्षाओं पर एक शांत, भक्तिपूर्ण चिंतन—शांति, स्मरण, और दिव्य गुणों को विकसित करना। नेगेटिविटी को छोड़ दें, मीठा बोलें, और घर की आंतरिक यात्रा पर ध्यान केंद्रित करें। ओम शांति। Image: RAY LEI, Pexels
Transcript
Om Shanti Om Shanti Om Shanti Om Shanti Thank you for watching it Thank you for watching it Thank you for watching it आपको प्रस्तुत्र होते हैं हम से ज़ादा भाग़ेवाद इस सुष्टी में हो रहे हैं। इतने बाद्यावान है तो उससे उच्छा बाद्या किसी को प्राप्त इतने बाद्यावान है। तो संते बाबा के आज के साकार मदुर मा वाक्य अगर आप करते हैं, आप करते हैं। आपको परतकता है कि इपड़ा निकल दाइनी गे तो इपने को देधें सुसंते बाबा के आज के साखार मदर मामा के तो बाबा कहते हैं कि बचे क्या बते हैं आप पर आकर दिली ओर में तेर सिस्टम प्रमस्ट क्योंकि तो बाबल कहते हैं, यहाँ पर आके बाबल क्या बताते हैं हमको? देविगुं बच्चों को दारण करनी चाहिए। बाबा के ते किसी भी हालत में राफटा हो गेना कुछ पी गेव देना तो बाबा कहते है ऐसे बैड मैनर्स नहीं होनी चाहिए। पुर बाबों कहते हैं आदद होनी चाहिए कि इसके चुप रहे है पादरी लोग जो हैं अगर वो कहीं चलते हैं अगर कहीं प्रियाद में हैते तो वो किसे को देखना भी पसंद नहीं करते किसकी याद में रहना पसंद करते हैं। क्राइस्ट की याद में रहे हैं। बले खटे भी चल रहे हैं, तो वो भी आपस में बादचीत है। यहीं करते हैं और बच्चों को किसको याद करने है क्राइस्ट के विपिता चीज़ा आप खुछ से पूछ सकते हैं अगर हम वारी में आते हैं तो वाणी में आते हुए याद पिक सकती हैं आतमा अपने पिता को याद कर सकती हैं वाणी में आते हुए आत्मा को सोभाब क्या है? सालेंस ही उसका स्वधार्म है बाबा का भी क्या है शाल्के का वो स्वधार्म है शांती के सागल को टच करना है तो इसके लिए शांत स्वधब में टिकना अधियावशक है। उसको बहुत बहुत टेंशन मिलाते हैं। बच्चों को भी अधिक बाच्चियों में नहीं आना चाहिए। भ्यास रखना चुप रहने का। सामने वाला सबको स्वधार में टिका हूँ, कुछ नहीं पता चाहता कौन किसमें करना। किसका किस सम्में बाबा ने बुद्धी के डोल फीचे भी हुआ हमारे सामने बैठा हुआ। उसके दोर कीछी हुई है और उस समय अगर हम वाड़ी में आ गए तो क्या किया क्योंकि मेरे करमा इसके दोर को आपने इंचे लिए आया था। बाबा कहते हैं, ब्याज गुर्व को भी शांती बने लिखा और दूसरों को भी बाबा के याद लिखा। तो सुनते हैं बावा के वहाँ भाग के तारीक है 6 चुलाई 2024 आज बावने कहा मुझे बच्चे जी बावने बाव की याद से बुद्धी स्वच्च बती मिचे बच्चे बाप की याज से बुद्धी स्वच्च बनती है और क्या हम तयार हैं से? शुरृता भी नाचने तो क्या आजागा जेव गड़ो देबे बुन आते हैं देपे बोड़ आते हैं। इसलिए इसलिए कैसे याद करना चाहिए इसलिए एकान्त बेबे एक कान तुम्हें बेड़ते हैं। अपने आव से पूछो। की दैवी गुण कितने है इसलिए एकांत में बैट अपने आप से पूछो। कि जैवी गुरू कितने आये हैं इनिशानी होती है। चितना याद नहीं। उतने जहवी बुल तो खली आज में बैठे इतने आट गंटे का चाट हो गया दस गंटे का चाट हो गया बाबा कहते हो उससे नहीं निशानिया देखो कहां तक पहुंच गया उससे पता चलता है कि हमारा भ्यास कैसा चलता है। बाई संस्काल, हमारे मैनर्स, हमारी आदते कितनी सुदरिये। सुदरिये तो याद एक्कुरेट हैं, नहीं सुदरिये तो सही कितनी याद नहीं चलता है। बाप की याद से बुद्धी सुच बनती हैं। देवे गुण आते हैं इसलिए एकान्त में बैट अपने आप से पूछों कि देवी गुण कितने हैं। आज का प्रश्ट सबसे बड़ा आसुरी अभगुण कौन सा है? जो बच्चों में नहीं होना चाहिए। सबसे बड़ा आसुरी अवगुण कौन सा है? जो बच्चों में नहीं होना चाहिए। पांसा मुखा वद्धा से लगते हैं मेरे लोगों Thank you for watching it. तो उनको लगते ये नहीं होना चाहिए। वाज़ान कोई ऐसा कोई चीज़ नहीं गंद संस्कार मैंसे लगते हैं यह नहीं है यह बाबा की यह हमारे बद को ब्रह्ष्ट कराता है। एर्शा से बहुत सा लगों पैदा हो जाता है। किसी को बीचे लेका रहने के लिए। इंस्ट्रेंट रियाक्शन। कडमे वचन बोल। प्रस्तुत्र प्रस्तुत्र किसी के आपगुण को देखना, वेरी गुड़, ये भी जो है, ये ट्रिगर पॉंट हो जाता है, सामने वाले के आपगुण को देखते हैं, तो अंदर से उजिन तन जालता हो गुशना हो शिदी का जालता रियाच हो। पूर्ण से उपर पाई बाबा की याद बुला देते हैं। निकटेम एनर्जी अंदर नहीं आता है। किसी व्यक्ते के सामने आने से अगर पास्ट में कुछ हुआ है तो पाईल फिर से पुल जाती हैं। तो जैंबेंटर हैं। पीछे का बैगेज कैरी करना। आपको परकता है कि अपने परकता है। मैं पनी होना चाहिए, मैंने यह किया, मैं यह करती हूँ। इगू तो ऐसे बहुत सारे चीज़ें जो हमको लगता है हमारे पाथ को हमारे पद को ब्रश्ट कराता है और बाबा की आग भुलाता है सबसे बड़ा आपगुण है किसी से रफ डब बात करना या कटू वचन बोलना सबसे बड़ा आसुरी आवगुण है इसी से रफ डब बात करना या कटू वजट बोला इसे ही भूत कहा जाता है इसे ही भूत कहा जाता है जब कोई में यहाँ भूत प्रवेश करते हैं जब कोई में यह भूत प्रवेश करते हैं तो बहुत नुखसान कर देते हैं। जब कोई में यहाँ भूत प्रवेश करती हैं तो बहुत नुखसान कर देती हैं। इसलिए गए किसी के आदत हो इस परकार से बात करने के इसलिए उन से किनारा कर लेना है। इसलिए उनसे किनारा कर लेना चाहिए। इनके से गिधाला कर लेना चाहिए इसे थोड़ा साइड ही दो अगर आपको प्रस्तुत करते हैं, आपको प्रस्तुत करते हैं जो हमें नीचे गिडाने की पूरी है। नीचे गिडाते हैं, उनसे गिडाना कर लेने चाहिए। जो पर्चिंतन करते हैं, दो दर्खी बाते करते हैं, उनसे किनारा करें रच्चियों, ये सेफ रहेंगे। अच्छा उनसे किनारा करें रच्चियों। संस्कार मैच करनी चाहिए। संस्कार तो सबके डिफरंट होगे, संस्कार तो किसी के बीच से होई नहीं सकते। किनारा बाबा कहते हैं उस कोंटेक्स में किसी का भूत नहीं लेना है संस्कार तो अलगों ने संस्कार तो मिलाने का प्रयास करना चाहिए उसमें पिया थोड़ी होना चाहिए वो बात सुनना चाहिए लेकिन बचा, पुरटेक्शन किस से रखनी चाहिए? कोई नेगटिविटी हुच मिला है, तो ऐसे उस नेगटिविटी से किनारा करना, बेकती से किनारा नहीं करना, नेगटिविटी से किनारा करना, कौन-कौन से नेगटिविटी से हम अपना पुरटेक्ट करना चाहिए? जै आपको वेस्ट आउट से हैं। जिनको अन्दसे था चलता है ना क्या फ़र्क पड़ता है। हम बहुत अच्छे चल रहे हैं जैसे चलाएं चलाएं, ठीक है, ऐसे ही ठीक है तो ये भी बहुत ध्यान, अगर मेरा लक्षे उच है, तो मुझे उनके संगमें, उनके संगत में नहीं आना है। जिनको डाउट है। पतानी कैसे है पता नहीं, ब्राह्मद पहिवार के बारे में कुछ अचानक बाबा के बारे में कुछ बोल देते हैं। उनके भी सांगो से बचना चाहिए। हाँ हाल बेले है चलता है इतना तो चलते है इतना तो बोली देते है इतना तो बड़े बड़े भी बोल देते है इसका अपने ये पहुँ साधर नीती चल रहे हैं, तो वो हमें भी नुफसान पोचा सकते हैं, तो उनसे बहुती प्यार से गिनारा करो। तो सिर्फ कमियां देखते हैं अगर पीछे चर्षा करने में आएंगे तो प्रेवींग नेचर होती हैं। बहुत हमें बहुत बारी क्योंकि हमारा पुर्शार साधारनी बहुत उच्छे हैं। हम एफोर्ड नहीं कर सकते। हम ऐसी आत्मों को अपने आसपस अगर हमने उनकी जाता बाते सुन ली तो उनका प्रभाव कल को अवैशे ही हमारे उपर पड़ेगा क्योंकि एक भी वाणी जो है वो डिलीट नहीं हो सकती किस نے कुछ कहा वो अंटर बैट जाती हैं किसने से पूस चलते जाते कहा पतानी वो आजकल ऐसे चल रहे हैं तो उससे हमें द्यान नहीं आएगा। कि उस आत्मा ने ये कुछ बोला। बाद मन मुद्धी उस पर चिंतन करना शुरू करता था। अच्छा वो आजकले ऐसे चल रही है। जब वात्म हमारे सामने आएगे, थोड़ा सा हम उसके लिए जज्ञ्मेटर बन जाते हैं। इसलिए अगर हम देखते हैं कोई व्यक्तर ऐसे कौमंट करता हैं कभी कभी अचानक केज़ो की बाहुत करते हैं, उनसे किनाया हैं क्योंकि वो आत्मा हमारे लिए भे जैमेंटल बनने के निमित बन जाते हैं और ब्रामण कईवार से दूर करने के इसलिए वेरी वेरी क्यूर्पूर्ण है। हमारी आता चल रही है खुद गए बैगज अतारने की किसी और के भी अगर हमें ये आदते ले ले आत्मा तक पहुँचना देसिनेशन तक पहुँचना बहुत उच्छल हो जाएगा। बावत्या कहते हैं जितना हो सके इसलिए उन से किनारा कर लेना चाहिए। वो परखने की शक्ति है। हर नमबर वार सारे हाथ में यही पड़ी हैं वो बहुत क्यार पड़ी हैं इसलिए उनसे किनारा कर लेना चाहिए जिनना हो सके अभ्यास के अपना लक्ष लिया रो क्या केवल उसका ही सपोर्ट लो उनी की वाणी को सपोर्ट दो, उनी के साथ टाइम अपना इंवेस्ट करो, जो कि हमारे अभ्याज को सपोर्ट कर दें। हमारा ब्याज क्या हमारा लक्षी क्या चितना हो सके अभ्यास करो अब घर जाना है आपको परकता है जितना हो सके अभ्यास करो आप घर जाना है फिर नई राजधानी में आना है इस दुनिया में सब कुछ देखते हुए कुछ भी दिखाई ना देख। इस दुनिया में सब कुछ देखते हुए कुछ भी दिखाई ना दे इस तुम्हें नहीं दुनिया का वाड़न अधिक सुनना है और नहीं जुनिया का बाड़ने गब नहीं जुन्या में सब कुछ देखते हुए कुछ भी दिखाई नहीं देते। ओम शानती बाव बैट बच्चो को समझाते हैं जाना तो है कैसे शरीर चोड़क इंडियो जबा वेगरे कह रहे हैं न नाके भी साथ बे नहीं चाहें। इस दुनिया को भी भूल जाने का जब शरीद छूटे या फिर शरीद होते हुए भ्यास यह भी एक अभ्यास है। इस अभ्यास को जो आत्मा ने करना ही है उस अभ्यास को शरीब में रहते हुए ही हरना है। जब कोई शरीर में खिर्ट-खिर्ट होती है, तो शरीर को भी कोशिश कर बोलना हूँ। तो दुनिया को भी भूला होता है। बोलने का भ्यास रहते हैं कभ करते हैं भ्यास हम सुब्ब सुभोको वातावन्ड जो है वो सपोर्ट करते हैं लेकिन कौन कर सकते हैं सुबह को करना भी अफने आप में कोई इतना असान नहीं है। सुबह तो सौपर्टीशत बहुत बहुत स्पोर्ट मिलते हैं लेकिन सुबत करे कोई करे मना उठतो जाएंगे उठना कोई मुश्किल नहीं है लेकिन उठ के हमारी मन बुद्धी इतनी जागरित हो के उस उभ्यास को करपाएं उसके लिए ताकत चेहूँ। इसके लिए लक्षी बहुत क्लियर होना चाहिए इंचे का भ्यास बहुत अच्छा होना चाहिए क्या अन्दर वो आकर्शन होनी चाहिए उस अभ्यास के परती तब हम सुबह को अभ्यास कर सकते हैं अन्यथा सुबह उठने के बावजूर भी हम उस अभ्यास को नहीं कर सकते हैं तो बाबा कहते है कि बाबागेटी भूले का भ्यास रहता है सुबो को बस अवापस जाने ये ग्यान तो बच्चों को मिला है सारी दुनिया को छोड़ अब घय जाना है जास्ती घ्यान के तो दर्कार नहीं रहती है, अच्छुणि! आत्मा सत्य सोरुप में आ जाती है तो उसको ग्यान भी सुनने का मन नहीं करता है। उसको लगता है कोई ग्यान भी ना सुना है। वारी से परेच है। बाबा कहते हैं जासती ज्यान के तो दर्कार ही नहीं लेती जब स्वरूम में आ रहे हैं आप क्या क्या कोशिश कर उसी धूमे देखा। जाये जाये बात को सकते हैं बर शरीर को कितनी भी तकलीफ होती है। बच्चों को सुम्झाय जाता है कैसे अभ्यास करूँ या तुम्हें शरीर भी याद नहाई। जैसे के तो वो ही नहीं। जैसे के तू ओई में यो याज़ जैसे कि कभी कभी ऐसे पीन होना चाहिए जैसे इस घर में मैं हुई नहीं है। अब सोचो था। क्या नहीं महम तो जब है नहीं हम, शरीर ही खतम हो गया, अब कौन सी चिंता, कौन सा चिंतन, कैसा चिंतन, मैं हूई नहीं हूँ। तो इसका अभ्यात कभ करना है शरीर में होते हूँ, जैसी की मैं, जैसी की तुम, हूई नहीं हूँ। यह भी अच्छा ब्यास है बार बार सोचो प्रस्तुम्प बाके थोड़ा समय जाना है घर पिर बाप की मदल है या इनकी अपनी मदल है मदद मिलती जरूर अगर बच्चे अभ्यास करते हैं तो बच्चे अभ्यास करते हैं उनको मदद मिलती है जरूर और पुरुशान भी करना होता है ऐसे नहीं हम तो हैं ही होई जाएंगे ब्राम बारुसार बाबा कहते हैं नहीं न्यारे होने का शरीर से डिटाज होने का अभ्यास करना होता है। ये जो कुछ देखने में आता है क्या अभ्यास करने जो कोई देखने में आता है बैठ है और बोजन। ऐसे लोगों कुम हो गई। कुमों के बैठे संगतर में बहटि हुआ 4-5 लोग सामने बेटे हैं, अंदर से सब गुर्भू रहो। वाड़ी से पढ़ाचने के दूम के लिए। तो बाबा कहती है जो पूर्टेट्मी में आता है वो है ही नहीं क्या अंतर से बुद्धी में चलना चाहिए वो है ही नहीं कोई हमसे बात करी नहीं है कभी कभी ऐसा होना चाहिए इस संगतार में बैठे हैं। परन्तु कोई बात करने आए? और क्या आनुभव हो? साइलेंज साइलेंज साइलेंज कोई हम से बात करी नहीं सकता ऐसा अभ्यास ब्रह्मा बाबा के पाल जाते थे तो बात नहीं करते थे। दादियों के पास जाते थो कई बाद जिसकी जो वाइब्रेशन होगी वाइब्रेशन आपको क्या होगी तच करेंगे आप उसी वाइब्रेशन में आजाएंगे तो बाबा कहते हैं कि जो कुछ देखने में आता वो है ही नहीं। अब घर जाना है। वहाँ से पिर अपनी राजधानी में आना है। पिछारी में ये दो बातें जाका रहती हैं बाबा के तो दो पक्का करनो क्या जाना है पिराना है जाना है खुळाने की लक्षियों बदुबन जाना है, बदुबन से आना है। हम क्या बोलते हैं? घहर जाना है, घहर से वापस आना है। देखा जाता है इस याद मेरे लिए अगर वो बैटी है तो पड़ेंगे बैटे बैटे के आप थे याद में रहने से शरीर के रोग जो तंग करते हैं वो अभी आटो मेटिकली बेंदे हो जाता है वो खुश ही रह जाती है। रोग तो मैसूस नहीं होता। सिर्फ क्या रह जाती है? खुश ही रह जाती है। खुशी जैसी खुराक नहीं ही इसलिए बच्चों को भी यह समझाना पड़ता है बंची अब घार चलना है स्वीट ओं चलना है इस पुरानी दुनिया को भूल जाना है हम क्या मदद करेंगे बाबा हमें मदद करने हैं न हम क्या मदद कर सकते हैं कम से कम अपने ब्राह्मण परिवार को इस ब्रामण परिवार को नीचे लाने के लिए मिलते हैं। ब्राह्मन पईवार को केवल घर याद लाने के लिए। ब्रामण परिवार से वो बाते ना करें कि ये ब्रामण परिवार क्या भीचारा पैसे स्ट्रगर कर रहे हैं नीचे को भूलने के लिए और हम दो बातें और करें चै ब्रामणों की करें चै सेवा की करें मदद तो नहीं करेंगा न उसको घर में टिकने के लिए हमारा हमारी मदद हमारा कॉंट्रिवुशन ये रहे हैं कि मेरा या आत्मा भाई उड़ने में उसको मैं मदद करता हूँ यह उड़ने की कोशिश करता हूँ इसको उलने में मदद करो ना कि इसके पंक में दो बोजा तो बातों का बोजा आसुबे न ऐसा हो था अब सामको न ऐसा हो था बिपी न ये ऐसा हो था कुछ पॉबलम आ रही है शेयर करना पर्टिकुलंड आत्मा से अबसूरूट्री भाइब। लेकिन यह बातें करने की आदस है। योग की बाते करो द्यान के कोई बात जो कि उसको मदद करें वो कर रूँ दिन चलेया की बात अव डिलीट करते हैं जिन चेले के बाद क्या कर रहे हैं? इसके उसके बाद क्या कर रहे हैं? तो बावा कहते हैं कि पच्चो को बच्चे अब घर चलना है बाबा कहते हैं इसलिए बच्चों को भी यहां समझाना पड़ता है बच्चे अब घर चलना है स्वीट होम में चलना हैं लास्त के दिनों में एक दो साल का भ्यास क्या था? तो दीदी को बहुत कुशिश की गई कि दीदी इसी तरीके से ये जो लाइनन छोड़ ले। जब देखो अब घर चलना है। जब देखो अब घर चलना है। जब देखो अब घर चलना है। जब देखो अब घर चलना है। जब देखो अब घर चलना है। जब देखो अब घर चलना है। जब देखो अब घर चलना है। जब देखो अब घर चलना है। जब देखो अब घ दादी और दीडी थे न दीडी का पिछले एक दू साल दीडी ने इस लाइन को पकड़ ले था आप घ़र चले न तो सबको अंदर से आ दीडी का तो जो फिलो पार्ट पूरा हो रहा है तो किसी को नहीं अच्छा लगता था तो वो कोशिल करते थे कि दीदी को इंगेज करें। दीदी आप उसके ऊपर ब्रामरों को क्लास करना हो ना आप दीदी की क्लास में की टॉक हो। अब घर चलना है। दीदी से कोई ओर बाल सुनाओ। दीदी आप बाबा के टैम करें बाबा सुनाओ। बाबा यही कहते थे, अब घर चलना है। तो दीदी ने खुद भी टिका और सबको भी उसी में टिका दीदी कहते है और कुछ नहीं आप घ़र चलने तो बाबा भी क्या कहते है बच्चे अब घर चलना है, स्रीट, मुम्मे चलना है इस पुरानी दुनियों को भूल जाने इसको कहा जाता है याद की यातरा मदद करनी हमें एक दुसरे के लिए किस के लिए याद की यात्रा के लिए अभी ही बच्चों को मालों पड़ता हैं बाप कर्प कर्प आते हैं यहीं सुनाते हैं करकु बादवे मिलेंगे। बाप कहते हैं बच्चे अभी तुम जो सुनते हो फिर कल्प बाद भी यही सुनेंगे ये तो बच्चे जानते हैं। बाब कहते हैं हम कल्प कल्प आकर बच्चों को मार्ग बताते हैं। मारग पर चलना पताता तो मैं रोज नहीं बताता तो मैं रोज मार्ग पर चलना बच्चों का काम है। बाब आकर मार्ग बताते हैं और साथ में ले जाते हैं सर्फ मार्ग नहीं बताते हैं चोड़के नहीं चले जाते हैं, सुर्व मार्ग नहीं बताते हैं, लेकिन साथ में भी ले जाते हैं। यह जो चित्र आदी है पिचारी में कुछ भी काम नहीं आते हैं। बाप ने अपना परीछे दे दिया है, बच्चे समझ जाते हैं। बाब का वर्सा बेहरत की बादशाही है। जो कल मंदिरों में जाते थे महिमा गाते थे इन बच्चों की लक्ष्मि नारण के बाब करें लक्ष्मि नारण कौन है बच्चे हैं बाबा तो इन्हों को भी बच्चे बच्चे कहेंगे न जो उन्हों के ऊच बनने की महिमा गाते थे आप फिर ऊच बनने का पुर्शात करते उनकी पूजा करती थे, उसके बाद ब्रह्मा बाबो को कहने शायते हैं, तो यही बनते हैं। शिबाबा के लिए नई बात नहीं है। तुम बच्चों के लिए नई बात है। बाव तो पूरे चक्र को देखते हैं कि कल्प कल्प बने हैं कल्प कल्प बने था कल्प कल्प बनेगे हैं हमारे भी लगते हैं कि अरे हम देवी दिप्ता बन रहे हैं युत्त के मेदान में तो बच्चे हैं। संकल्प विकल्बी इन्हें तंग करेंगे बाबा कहते ही ये तो होगा आई ये खासी भी इनके करम का हिसाफ किताव है। रदिजन, कमलेश में इनको भोगना है ब्रह्मा बाबा की खासी नहीं छुड़ती। बाबा कहते बंचों को तो ये हिसाफ किताव है। तो हिसाफ किताब क्या और एक हासी है हिसाफ किताब बाबा तो मौज में, कौन से बाबा? शेबाबा इनको कर्मतीत बनना है। बाव तो है ही सदा, शिबाव तो है ही सदा कर्मतीत। उनके उपर किसी भी करम भोग का असर नहीं होता। हम तुम बच्चों को माया के तुफान आधी करमभोग आएंगे। कौन कह रहा है? अंदराल मा बाबा ये है समझाना चाहिए। कभी कभी होते है इतना अच्छा नहीं चल रहा योग भी इतना अच्छा नहीं चल रहा आज सारा दिन तो बड़े इच्छी स्थिती थी योग तो इतना अच्छा लगा नहीं क्या हुआ तो बाबा कहती यह बच्चों को माया के तुफान आदी करमों आएंगे चाहे शरीर का है चाहे किसी पुर्शात में उपर नीचे होने का है आएगा ये समझाना चाहिए, बाब तो रास्ता बताते हैं, बच्चों को सब कुछ समझाते हैं इस रत को कुछ होता है तो तुमको फीलिंग आएगी कि दादा को कुछ हुआ बाबा को कुछ होता है नहीं होता इनको होता है घ्यान मार्ग में अंदर शद्धा की बात नहीं है कि भुगवान आ गया मुझे क्यों होता है बाबा कहते हैं करम हो गया है यह सामनी आएंगे लेकिन क्या हो जाएगा। सूली का गाणा और राई का रूई बाबा को बाबा केते हैं बाब समझाते हैं मैं किस तन्में आता हूँ बहुत जन्मों के अंत के पति तन में मैं प्रवेश करता हूँ। दादा भी समझते हैं जैसे और बच्चे हैं। मैं भी हूँ दादा को शार्थ ही है संपूरण नहीं है। तुम सब प्रजापिता ब्रह्मा के बच्चे ब्रामण पुरुशात करते हों विष्णू पधपाने लक्ष्मी नारेन कहो विश्णू कहो बात तो एक ही है बाप ने समझाया भी है आगे नहीं समझते थे न ब्रह्मा विश्णू शंकर को न अपने आपको समझते थे अभी तो बाप को ब्रह्मा विश्णू शंकर को देखने से बुद्धी में आता है यह ब्रह्मा तपस्या करत इन एडवांस तुमको साक्षर का होता है ये बाबा फरिष्टा बनेंगे। प्रस्तुत करते हैं हम भी बनेंगे बाब कहते हैं तुम भी जानते हों हम कर्मातित अवस्ता को पाकर परिष्टा बनेंगे परतु नमब्बट वाद जब तुम फरिष्ता बनते हो तब समझते हो। कुछ देखते हैं जब तुम परिष्टा मतते हूं तब समझते हूं क्या होगा? अन्तोग अब लड़ाई लगेगी, समझा? कि बाबा हम बच्चों को कितना प्यार करते हैं हमारी फरिष्टा सिती होगी हम पर अब नीचे जा सरूरी होगा। उपर का प्रकाश है वो हमारे द्वारां नीचे फैलेगा इसको कहें के फरिश्ता सित्ती मतलब आउटसाइड इनसाइड नहीं जाएगा इनसाइड आउटसाइड होगा आत्मा उपर के सिती में होगी उपर के सिती का प्रकार्ष दुन्या में फैलेगा अब आरे दोर योगो परिर्ष्टा सिति पिर हमारे द्वारा बाहना लादा अरिश्टा सिती में क्या होगा आत्मिक सित्ती होगे सम्पुर्ण आत्मिक सित्ती उपर का प्रभाव मन आत्मा जो परंदाव निवासी है उसका प्रकाश यहां पर असर डालेगा और यहां से बाहर जाएगा। बाहर के दुनिया का प्रभाब हमारे पर नहीं पड़ेगा, तब डडाई लगेगा। बावा बच्चों के लिए कितना प्रभंद रस्ते है कि बच्चों के उपर बाहर का आसर जब आप करते हैं, आप करते हैं, आप करते हैं तो बाबा कहते हैं तब नड़ाई लगेगी मिर्वा मौत मरुगा शिकान दुनिया के लिए हाय होगी और तुम्हारे लिए वाननद का सम्मी होगा। यह बहुत उंच हवस्ता है। पच्चो को धारड़ा करनी है यह भी निश्य है कि हम चक्र लगाते हैं। और कोई इन बातों को समझना सके नया ग्यान है और पिर पावन मनने के लिए बाप याद सिखाते हैं योभी समश्टिओ बाप से वर्सा मिलता है। कर्पकर्पाप के बच्चे बनते हैं। चुरासी का चक्र लगाया है कोई को भी तुम समझाओ तुम आत्मा कोई को भी तुम समझाओं तुम आत्मा हूँ परंपिता पर्मात्मा बाप है अब आपको याद करो तो उनकी बुद्धी में आएगा देवी प्रिस बनना है तो इतना बुर्शात करना है। विकार आधी सब छोड़ देना है बाव समझाते हैं बेहन भाई भी नहीं भाई भाई सौन्जू, शरीर भी क्यों देखते हैं? भाई भाई समझो और बाब को याद करो तो वो भी कर्मनाशन होगे। और कोई तकलीफ नहीं गिता है। पूर्ची पिछारी में और कोई बातों के दर्कार नहीं पड़ेगी। क्या हो जागा निरे निरे निरे स्वरूप होते जाएंगे, बनते जाएंगे, बनते जाएंगे फिर ग्यान के भी कोई दर्कार, कोई मदर नहीं पड़ें। सिर्व आपको याद करना है आस्तिक बन्दा है ऐसा सर्गुण संपन बनना है लक्षमी नारें का चित्र बड़ा आक्यूरेट है। सिर्फ बाव को बोल जाने से अग्या देवी कुन धारण करना भी भूल जाते हैं अभी भी इस स्वैल्बी किस गरी बाब को भूते हैं उस गड़ी दैवी गुण धारण करना भी भूल जाते हैं। बाबा कहते बच्चे एकांत में बैट विचार करो। बाबा को याद करके हमको ये वनना है ये गुल धारन करना है बात तो बहुत चोटी है। बच्चों को कितनी मेहनत करनी पड़ते हैं वो देखते हैं। अभ्यास अंदर से कितना चलता है। कितना दे अबीमान आ जाते हैं अब्यास करते हैं बे दे अबीमान अब्यास करते हैं बे दे अबीमान बाव कहते हैं देही अभिमानी भवण बाब से ही वर्सा लेना है बाब को याद करेंगे तब तो आपको याद करेंगे तब तो किच्चडा निकलेगा बच्चें जानते हैं अभी बाबा आया हुआ है ब्रह्मा द्वारा ने दुनिया के स्थापना करते हैं। हम अगले जनव में बोल पाएँगे। अगले जनप में बोल पाई नहीं। अगले पांच दा वर्ष एल नाईं जोड़ पाईंगी। आज से कियो बोलसारे उमितों, आज से 10 वर्ष पहले भी। क्या ये लाइन बोलने का हग था हमको ये अंदर से बोल सकते थे लाइन क्या कौन से लाइन कौन से लाइन अभी बाना आया हुआ। कौन से लाइफ? आगले जनब में बोल पाई नहीं। पूरे काड़ तुम्हें फिर से लाइन बोल बाइन है। जब तक यह जदा है। उसके बाद ये लाइट हम कभी भी नहीं बोल पाए। समती नहीं है तो ये एक एक लाइन जो है ये लाइन अन्दर से जो बोलने का भी भाग गया है, सुनने का भी भाग गया है केवल इस जनोगी इसके लावा कभी नहीं होगा तो बाबा कहते हैं बच्चे जानते हैं अभी बाबा आया हुआ है ब्रह्मा दोरे नई दुनिया के स्थापना करते हैं। तुम बच्चे जानते हूँ स्थापना हो रही हैं इतनी सहज बात भी तुमसे खिसक चाहती है? एक अलफ है बेहद के बाब से बादशा ही मिलती है बाप को याद करने से ने जुनिया याद आ जाती है अब लाये कुछ जाये भी बहुत अच्छा पत पा सकती है सिर्फ क्या करना है अपनी को आत्मा समझ बात को याद करना है बाप ने तो रास्ता बताया है, कहते है अपने को आत्मा निष्य करो बाप के बैचान तो मिली वो तीम में बैड इस पे भी हम वर्क्षॉप कर सकते हैं किस लाइन पे? कि अगर आत्मा निर्श्य है तो क्या होगा? और दे निश्या तो क्या होगा, दोनों भी वर्क्षॉप हो सकते हैं। अगर आत्मा विशिन तो उसके लिशानी क्या होगी कि इस इनको आतमा निर्शिया करेंको देनिष्य और इसके उपना वावशाप पर सकते हैं तो बाबा कहते हैं कि अपने को आत्मा निष्य करो बाब की पहिचान तो मिले बुद्धी में बैठ जाता है जब अभू 84 जनव पूरे हुए घर जाएंगे फिर आक्र स्वल्म में पाठ बजाएंगे। यो प्रश्न नहीं उड़ता कि कहां याद करूँ, कैसे करूँ बाब कहा भी जाये तुम तो उनके बच्चे हो न बेहत के बाब को याद करना यहाँ बैठे हो तो तुमको आनन्द आता है। सम्हुप बाप से मिलते हो। बाबे बिलेर में बदुबर में जाती था तो कैन जर से आता था। अब हम परंधा, परंधा में नहीं याद करते हैं, सब तो रिलाइज, सब तो है ही सामद. आप क्या सोचते हैं कि मैं याद कर रहा हूँ, याद कर रहा हूँ, है सामने, मैं बैठा हूँ सामने? मनुश्यों मोच जाते हैं कि शिवाबा की जैनती कैसे होगी। यह अभी समझते नहीं कि शिवरात्री क्यों कहा जाता है। श्रीकृष्ण के लिए समझते हैं न, रात को जैनती होती हैं, बारा वज्य जनम होता हैं, परण्तो इस रात्री की बात नहीं है। वो आदा कल्प की रात पूरी होती है फिर बाप को आना पड़ता है ने दुनिया के सापना करने है बहुत सहज बच्चे कुछ समझते हैं सहज है दैवी गुण धारन करने है नहीं तो तोड़ा अगर तयावी गुण नहीं, तो कौन सा गुण है? सब क्या हो जाएगा? सब क्या हो जाएगा? सब क्या हो जाएगा? सब क्या हो जाएगा? सब क्या हो जाएगा? सब क्या ह बेड़ी निन्दा क्राणिया वाली कैसे कैसे होती बाबा के निंदा? कैसे होती बाबा के निंदा? कब कब कराते हैं? जब भी भी महारे जाएगे बुस्ता कर रहे हैं। महारे जाएगे बुस्ता कर रहे हैं। हराई जाएगे बुस्ता कर रहे हैं। कैसे होती है निम्दा? जूद बोती है आप कैसे होते हैं गंदर? प्रस्तुत्र करते हैं शिरीवत के नूसा कोई मेरे लग्कान करते हैं उसके एगेंस और कैसे होती है पिन्दा? आपनों को जुरुब पताओना चाहिए, ताकि हमसे कभी भी उन्हां पताओना चाहिए. अब ये साधरन बोल नहीं है दरेड सत्वुरु के क्या हो जाती हैं। तो बाबा कहते हैं, अगर बच्ची ऐसा करते हैं तो बाबा बच्चे को क्या वार्ण ही देते हैं? मेरी निंदा कराने वाले ऊज धार नहीं पा सकें। बाब की बिंदा कराएंगे तो वह सब रश्ट हो जाएगा गोहोट मीठा बनना जाये। रख टफ बात करना ये देवी गुण नहीं है समझना चाहिए ये आसुर या गुण है प्यार से संजाना होता है ये तुम्हारा दैविरू नहीं है। यह अभी बच्चे जानते हैं अभी कल युख पूरा होता है यहाँ है संगम युख मनुश्यों को तो कुछ पता नहीं है कुम्बुगारण की नीद में सोय पड़े समझते हैं 40, 000 वर्ष पड़े हम जीते रहेंगे, सुक भोगते रहेंगे, ये नहीं समझते हैं, दिन प्रति दिन और ही तब उपरघान बनते हैं। तुम बच्चों ने विनाश का साक्षटकार भी किया हैं, आगे चलकर ब्रह्माकार, श्रिकृष्ण का भी साक्षटकार करते रहेंगे। ब्रह्मा के पास जाने से तुम स्वर्द कहा? स्वर्ग का ऐसा प्रिंस बनेंगे इसलिए अक्सर करते हैं ब्रह्मा और श्रिकेश में दोनों का साक्षलता होते हैं। कोई को विश्णू का होता है परन्तु उनसे इतना समझ नहीं सकेगे। वेश कुनों से नारण का होने से समझ सकते हैं हम यहां जाते ही हैं देवता मनने के लिए तो तुम अभी सुष्टी के आधी मद्यात का पाठ पढ़ते हूं। बार पढ़ाया जाता है इतना लंबा छोड़ा हैं बाबा जो रोज घ्यान देते हैं क्यूं ताल केंग अगले ताकि याग देते के बात पढ़ाया जाते हैं याद अकेले क्योंकि जो बाते हमसे की जाते हैं उसको या हमसे बाते करें क्या हो जाएगा वो बात याद आते हैं तो बाबे कहते हैं च्या ठीक है सबस्यादा बात फिर मैं करता हूँ 3 पेज़ की मुर्ली एक गंड़ा बात करूँगा ताकि तुम्हें किसकी बात यादा है? मेरी बात यादा है। यह पिछली लाइन समझ में नहीं है कि विश्णु और नरायन दोनों अलग लग करते हैं। हाँ, तो बाबा कहते है विश्णु का सपो साक्षात कर होता है, अब समझ नहीं आता कि चार हात वाला तो हम नहीं बन सक तो वो लक्षेंदा से नहीं बैठता है। नारेंड का साक्षत कर आते तो खुशी होती हैं, हम ये नारेंड बनेंगे। ब्रह्मा का साक्षटकार होते हैं तो लोगों को अंदर से खीच होती है कि अच्छा ये कौन है इसके पास जाना है तो जो विदेशी भाईव हैं न मेजौरिटी उनको पहले ब्रह्मा का साक्षटकार हुआ और फिर जब वो सेंटर आते हो वो कहते हैं इनसे तो हम मिले थे य बहुत गते पार पड़ाया जाते हैं याद के लिए पाट आत्मा पढ़ती है देहे का महान उतल जाता है। आत्मा ही सब कुछ करती हैं अच्छे अत्मा बुरे संसकार आत्मा में ही होते हैं तो मीठे मीठे बचे पाँच सथा वर्ष के बाद आकर मिले हो। तो वही वो फीचर्स भी वही है तुम्हारे सिदा वर्ष पेले पाँचदा वर्ष पहले भी तुम ही थे। तुम भी कहते हो पाँचदा वर्ष बाद आप वही आकर मिले हो। जो हम को मनुष्य से देवता वना रहे हो, हम देवता थे फिर असुर वन पड़ें। सारे के साथ। देवताओं के गुण गाते आई अपने अवगुण वर्णन करते हैं अब फिर देवता बनना है क्योंकि देवी दुनिया में जाना है तो अब अच्छी निति पुर्शाद का उच पद्भ। टीचर तो सबको कहेंगे न बढ़ो अच्छी मार्स में पास हो, तो हमारा भी दाउंबाला हो। और तुम्हारे के साथ बाल्या होगा ऐसे बहुत कहते हैं बाबा आपके पास आने से पुछ निकलता ही नहीं सब बूल जाते बाबा के पास जाने के लिए एक बात सोचते हैं कि जब जानते हैं तो बाबा के पास जाएंगे। आने से ही चुपो हो जाएंगे ये दुनिया जैसे की खतम हुई पड़ी है जैसे बच्चे आते हैं तो बच्चों को भी अधर से वो ही साइलेंस का इंपैक्ट होता है। वो बच्ची को से साइलेंस पर आ जाता है। बाबा कैते चेप चेप बोलो बोलो नहीं बाबा कुछ कुछ नहीं है बाबा कहते है फिर तुम आएंगे नई दुनिया में वो तो बड़ी शोबनी ने दुनिया होगी। कोई शांती दाम में विश्राम पाते हैं। कोई तो विश्राम नहीं मिलते हैं। कोई को विश्राँ नहीं मिलता है और राउंड पार्थ है परेंटु तमो प्रधान दुनिया से छूट जाते हैं। और सत्यों में क्या मिलते हैं वहाँ शानती सुक सब मिल जाते हैं। आपको ऐसे अच्छी लिथी पुर्शात करना चाहिए, ऐसे नहीं की। चोड़े में परकता है ऐसे नहीं कि जो नसीव में होता है। नहीं पुर्शात करना चाहिए। समझा जाता है कि राजधानी स्थापन हो रही है हम श्रीमत पर अखने लिए राजधानी सापन कर रहे हैं। जो श्रीमत देने वाला है वो खुद राजा आदी में ही बना है उनकी श्रीमत से हम बनते हैं। नई बात है ना कभी कोई ने न तो सुनी न देखी अब तुम बच्चें समझते हो, श्रीमत पर हम वैकुल्ड की बादशा ही स्थापन करते हैं, हमने अंगिनत बार राजा ही स्थापन की हैं, करते और गवाते हैं। ये चक्रुप फिर्ता ही रहता है पादरी लोग जब चक्र लगाने निकलते हैं तो और कोई को देखना भी पसंद नहीं करते हैं। सिर्फ क्राइस्ट के ही याद में रहते हैं। शान्ती में चक्र लगाते हैं समझ है न क्या समझ है कि शान्ती में ही उसके साथ connection होगा क्राइस के याद में कितना रहते हूं? जुरूर क्रैस का साक्षतकार हुआ होगा। बाबा कहते हैं सब वादरी ऐसे थोड़ी होते हैं कोटों में कोई तुम्हारे में भी दंबर वाग ओटो में कोई ऐसी याद में रहते हुँगे। ट्राई करके देखो और कोई को नहीं देखो। बाब को याद करते स्वाधर्शिन चक्र फिराते रहो तुमको अथाः खुशी होगे श्रेष्ट चारी देवता को कहा जाता है मनुष्य को क्या कहा जाता है परस्चाचारी इस समय तो देवता कोई है नहीं। आदा कलप दिन, आदा कलप रात ये हैं भारत की ही बात हैं। बाप कहते हैं मैं आकर सफ की सद्गती करता हूँ बाकि जो और धरम वाले हैं वह अपने अपने समय पर अपने धरम की आकर स्थापना करते हैं। सब आकर ये मंत्र ले जाते हैं। बाप को याद करना है। जो याद करेंगे वह अपने धर्म में पड़ते हैं। उच पद पाएंगे तुम बच्चों को पुर्शाद करके रुहानी म्यूज्यों अत्वा कॉलेज खोन ली चाहिए। लिख दो विश्व की अत्वा स्वर्द की बाच्च स्वर्द की राजाईं सिकेंड में कैसे मिल सकती हैं आकर समझो बाप को याद करो तो वेलकुंट की बाजचाही मिलेगी अच्छा मीठे मीठे सिकी लदे बच्चों प्रती मात पिता बाब दादा का याद प्यार और गुण मौनिंग रुहानी बाब के रुहानी बच्चों को नमस्ते आम रुहानी बच्चों की रुहानी बाब दादा को नमस्ते बाबा गुण मौनिंग बाबा शुक्रिया बाबा एक मिन दरना के लिए होंग के साथ सायन्स में आज बाबा ने क्या कहा? अपने मिये क्या लिया? जो पॉंट अपने लेविया इसके दिख लेगा। प्लिस्यू दाड़ा के लिए मुखे साथ पहला चलते पिड़ते एक बाप की ही यान रहे और कुछ देखते वे भी दिखाई ना देते चलते फिरते एक बाग की ही याद रहे और कुछ देखते हुए भी दिखाई ना दे ऐसा अभ्याज करना है ऐसा अप्याज करना है एकांत में अपनी जाज करनी हैं इकांत में अपनी जाज करनी हैं हमारे में दैवी गुण कहा तक आए हैं। एकांत में अपनी जाच करनी हैं कि हमारे में देवि उन कहां तक आये हैं। दूसरे ऐसा कोई कर्टब्य नहीं करना है ऐसा कोई कर्तव में नहीं करना है जिस से बाब की निन्दा हो। जिस से बाब की निंदा हो। दैवी गुढ धारण करवे हैं। देवी गुण धारण करने वो दीवे रहे बुद्धी में रहे अभी घर जाना है उद्धी में रहे अभी घारे जाना है। पिर अपनी राजधानी में आना है। फिर अपनी राय धानी में आना है बर्दान सेवाओं में शुब्भावना की एडिशन द्वारा सेवाओं में शुबभावना की एडिशन द्वारा शक्ती शाली अल प्राप्त करने वले सेवा महे शुब्भावना की अडिशन द्वारा शक्ती शाली फल प्राव्त करने वाले सफट दा बूरत भाव सेवाओं में शुब्भावना की अडिशन द्वारा शक्ति शाली फल प्राफ़त करने वाले सफलता मूरत भाव जो भी सेवा करते हैं। उसमें सर्वात्मों के सयोगदी भावना हो। खुशी की भावना वा सद्ध भावना हो तो हर कारे सहय चे सद्ध होगा। अखेले-अखेले के लिए सबकी भावनाओं का सईयोजुले के करूँ। जैसे पहले जमाने में कोई कारे करने जाते थे तो सारे परिवार के आशिर्वाद लेकर जाते थे। तो वर्तमान सेवाहों में यह अडिशन चाहिए। कोई बी कारे शुरू करने के पहले सभी के शुबभावनाए शुबकामणाए लो सर्व की संतुष्यता का बल भरो तब शक्ती शाली भल निकलेगा। स्लोगन जैसे बाम जी हाजर कहते हैं जैसे बाफ जी हाजर कहते हैं वैसे आप भी सेवा में जी हाजल जी हजूर करो जीसे बात जी हाजर कहते हैं मैंसे आप भी सेवा में जी हाज़र जी हुजूर करो तो पुन्ने जमा मुझाएगा। तो उन्ने जमा दो जाएगा। आज का व्यक्ति शारी का पौंट है यानी तुम आत्मा सदेव हर एक के परती मास्ट्र स्नेका साधर हैं। बिना स्नेके उसके पास और कुछ है नहीं है। कोई भी आएगा तो उसे स्ट नहीं ही देंगे आजकल संपत्ती से भी जादा स्नही की आवशक्ता है। स्नही की शक्की से दुश्मन को भी मित्र बना सकते हो। अपकायो पर भी उपकार कर सकते हैं। ओम शानती गराज गब्ली गब्ली अब सुईट होने का चल नहीं है अगर आप कहल जाना है तो अगर आपको प्राप्ति कर जाने और आने इसका प्यास है, तो प्राप्ति कर जाने और आने इसका प्यास मुत्यों भी कई बार अच्छा आनुभापूर्ट की जैसे हैं। बात को याद करेंगे तो किज़े जाने के लिए। इतना अभ्यास होना चाहिए कि शरीद चुदे तो शरीद जाने के लिए। तो इसका अभ्यास पहले से। आत्मा शरीद छोड़ेगी तब शरीद आदना है वो तो होना ही होना है क्योंना उसका भ्यास में होती है। दैवी गुण थारण करने हैं और मुझे करता हैं। आसुरी आसुरी आसुरी आसुरी आसुरी आसुरी भाई भाई के दुश्टी में भाई के बियों भाँ से उपर चला साइड चाहते हैं बाबा कहते हैं कि तुम पच्चों को भी कैसे होने हैं। बाबा कहते हैं कि तुम पच्चों को भी कैसे होने हैं। याद की याद चाहते हैं। बाबा कहते हैं कि तुम पच्चों को भी कैसे होने हैं। याइसे पर विसूचे। आपके आसा बुद्धे स्वच होते हैं। कुर्वाई स्कूल में भी क्या होता था? जब हम स्टडी करते थे तो क्या होता था? देखते थे कौन विश्यार है? संग उन्ही का करते थे, डल का नहीं करते थे तो ये भी क्या एक स्कूल है? क्या करने? विश्यारं का संग करने जब आप संपुर्ण परिष्टा बनोंगे तबी विनाश होगा। जितना साइलेंस में रहेंगे तो उतना ही अपने आपनी स्वरुप में ठीक पाएंगे और जब आपनी स्वरुप में ठीकेंगे तभी बाबति साइपी के लिख्षे होगा परिष्टा स्वरुप भी दिखा पाएंगे और मास्टर इस देख के साइपी शंकी के साइपी में भ अपने आप इस आए हुँ, अपने आप यहाँ जाएगे। और किसका कोई पूर्ट भावा कहते हैं कि बच्चों में इसे कुछ होना चाहते हैं जिसे चलते हुए रस्टिंग में अगर थूक भी आजाएं तो थूक भी ऐसी जगे डालना चाहते हैं जिसे दूसरी आत्मां को दिखाई नादी हमारे मैनर्स बहुत अच्छ होनी चाहिए, बाबा के बच्चे बने हैं, हमारा बोलना, हमारा चलना, हमारा पिरना, हर चीज़ बहुत बाबा का दर्शन कराते हैं। तो हम बच्चे भूल से भी कुछ कलत नहीं कर सकते हैं। जैसे खासी आती वो भी कुछ वल्ड करम की सजाया है। आप कहते हैं तुम्हारा करम बोग चुक्तु हो रहा है। यह तुम्हारा ही सापकता है। किसी से भी रफ्टम बात नहीं करें। यह रफ्टम बात नहीं करें। यह ज्यान मार्ग में अंधर शद्दा के लिए कोई बात नहीं है। बाबा कहते है यहाँ पर ऐसे नहीं है, बाबा का आशिरवाद मिलेगा तो ठीक हो जाएगा। बाबा यहाँ उसका आशिरबाद मिल जाएगा बैंक थेती बड़ा ही है करोंगे तो भाईंगे खुशी जैसे खुशी जैसे खुशी जैसे तुम्हारा रोग भी खतम हो जाएगा। रोग भी तुम्हें भूल जाएगा। केबल खुशी रह जाएगा। दो ही बाते याद रखेंगे। अब जाना हैं फिर आना हैं। पाबा ने बोला अंतुल तुमको ज्ञान की भी दर्कार नहीं हो जाएगा। बाबा कहते है जो मुडली है बढ़ाई है एक एबर यान में टिकाने के लिए यान में टिक जाओगे उसके पास इस बढ़ाई के दर्कार नहीं है बाई बहन भी नहीं, बाई बाई की दिश्टी है बाव क्या हो गया? आपको बहुत बहुत बहुत बहुत है चलोंग जाते हैं असमीते कुछ देखते हैं दुखें गुलादु आगर चाहते हैं। बुल्या जब आजे करते हैं तो मारे बाद आपको पेड़े लोगों के लिए चीज़े करें आपको बावा ठीका कर सकते हैं। गाजु आश्यतवर देखे पर उसके देख के आरहा है आपको परकता है मैं द्रियं मैं जानते ताजे हूँ बाता लगे। आईंगे जिनकरकर यादाते जेनकरकर आपको अच्छा करते हैं चलों साथ अदमी दे दे प्रस्तुत्र प्रस्तुत्र गल्ड़ जो भी यावारण चाहिए।

