इस जीवन में जो भी व्यक्ति आया है,
वो अलग-अलग प्रकार के संगर्ष कर रहा है। पारिवारिक संगर्ष,
सामाजिक संगर्ष,
व्यावारिक संगर्ष,
इन सारे संगर्षों के बीच उसका मन अशांत रहता है। हमारे शास्त्र कहते हैं,
मन को शांत रखने के लिए मंत्र का उचारण करना चाहिए। और इस कल्योग में भगवान अपने नाम रूपी मंत्र में अवतरित हुए हैं। इसलिए इस मन्त को शांत करने के लिए भगवान का ये हरेकृष्य महा मंत्र जाप मेरे साथ आप कीजिए। और एक दिव्य ध्यान की अवस्था को प्राप्त कीजिए। अन्त में आप अनभव करेंगे आपका मन शांत हो गया है,
प्रसन चित हो गया है,
चिंताओं से मुक्त हो गया है। आईए अगले पांच मिनित के लिए हम हरेकृष्य महा मंत्र ध्वनी ध्यान करते हैं। हरेकृष्य,
हरेकृष्य,
कृष्य,
कृष्य,
हरे,
हरे,
हरे राम,
हरे राम,
राम,
राम,
हरे,
हरे,
हरेकृष्य,
हरेकृष्य,
कृष्य,
कृष्य,
हरे,
हरे,
हरे राम,
हरे राम,
राम,
राम,
हरे,
हरे,
हरेकृष्य,
हरेकृष्य,
कृष्य,
कृष्य,
हरे,
हरे,
हरे राम,
हरे राम,
राम,
राम,
हरे,
हरे,
हरेकृष्य,
हरेकृष्य,
कृष्य,
कृष्य,
हरे,
हरे,
हरे राम,
हरे राम,
राम,
राम,
हरे,
हरे,
हरेकृष्य,
हरेकृष्य,
कृष्य,
कृष्य,
हरे,
हरे,
हरे राम,
हरे राम,
राम,
राम,
हरे,
हरे,
हरेकृष्य,
हरेकृष्य,
कृष्य,
कृष्य,
हरे,
हरे,
हरे राम,
हरे राम,