शान्त अवस्ता में आराम से बेट्ये या तो जमीन पर पलोथी मार के या कुरसी पर कौमलता से पूरे समय अपनी आँखे बंद रखे और अपनी रीड को पूरा सीधा रखे अपने हाथों को चिन मुद्रा में रखे यानी की धीरे से अंगूठे को पहली उंगली के साथ जोड ले बाकी उंगलिया सीधी रखे अपने हाथों को घुटनों पर रखे अपने पूरे शरीर को धीला छोड दीजिये पैरों की उंगलियों से सर के ऊपर तक कौमलता से मांस्पेशियों को धीला छोडने की तयारी करें इससे सब ही नसे धीली होंगी धीले से अपने शरीर के हर हिस्से को कसिये और धीला छोडें अपनी पैरों की उंगलियों से शुरू करें धीले से अपने पैरों की उंगलियों को कसे और धीला छोडें धीले से अपने तल्वों को कसे और धीला छोडें धीले से अपने पैरों को कसे और धीला छोडें धीले से अपनी एडियों को कसे और धीला छोडें धीले से अपनी पैर की पिंडलियों को कसे और धीला छोडें धीले से अपनी जांगों को कसे और धीला छोडें धीले से अपने कूल्हों को कसे और धीला छोडें धीले से अपनी निचले पेट को कसे और धीला छोडें धीले से अपनी निचली पीट को कसे और धीला छोडें धीले से अपनी ऊपरी पीट को कसे और धीला छोडें धीले से अपनी चाथी को कसे और धीला छोडें धीले से अपने कंधों को कसे और धीला छोडें धीले से अपनी ऊपरी बाज़ों को कसे और धीला छोडें धीले से अपनी निचली बाज़ों को कसे और धीला छोडें धीले से अपनी हतेलियों को कसे और धीला छोडें धीले से अपनी गर्दन को कसे और धीला छोडें धीले से अपनी ठोडी को कसे और धीला छोडें धीले से अपनी गालों को कसे और धीला छोडें धीले से अपनी माथे को कसे और धीला छोडें धीले से अपनी पूरे चहरे को कसे और धीला छोडें अब आपके पूरे शरीर में प्रान देते हुए जीवन शक्ती की कमपन की अनभूधी करें और जाके भाव की अनभूधी करें हलकापन महसूस करें अब सहजता से अपनी नाभी से गहरी सास लेनी शुरू करें अंदर और बाहर गहरी सास ले अपना ध्यान अपनी रीड की हडी की जड़ पर केंट्रित करें ऐसे सोचिए जैसे आपके सर के ऊपर एक छोटा सा छेद है जो आपको पूरे ब्रह्मान से सीधे जोड़े हुए हैं इस छेद से गहरी सास ले इस सास को अपनी रीड की हडी की जड़ तक ले जाये और फिर यहां से सर के छोटे से छेद से बाहर छोड़िये अब आप पूरे ब्रह्मान से अपनी रीड की हडी की जड़ तक सास ले रहे हैं और रीड की हडी की जड़ से पूरे ब्रह्मान में सास छोड़ रहे हैं बहुत धीरे से सास को अंदर और बाहर ले और उसकी अनुभूधी करें अब धीरे धीरे अपनी सास की गधी को बढ़ाये अगले पढ़ाओ तक लेकर जाये अपने सर के ऊपर से रीड की हडी की जड़ तक खीचे और अपनी रीड की हडी की जड़ से सर के ऊपर तक छोड़े धीरे धीरे अपनी सास की गधी अगले पढ़ाओ तक बढ़ाये अपने सर के ऊपर से रीड की हडी की जड़ तक खीचे और अपनी रीड की हडी की जड़ से सर के ऊपर तक छोड़े धीरे धीरे अपनी सास की गधी अगले पढ़ाओ तक बढ़ाये अपने सर के ऊपर से रीड की हडी की जड़ तक खीचे और अपनी रीड की हडी की जड़ से सर के ऊपर तक छोड़े अब अन्त में अपनी सास की गधी आख्री पढ़ाओ तक बढ़ाये जब तक आप हांफ रहे हो अपने सर के ऊपर से रीड की हडी की जड़ तक खीचे और अपनी रीड की हडी की जड़ से सर के ऊपर तक छोड़े आप अपनी सारी जमा की हुई भावनाओं को ब्रह्मान में समर्पित कर रहे हैं आप अपनी रीड की हडी की जड़ से अपनी सारी जमा करी हुई चीजों को ब्रह्मान में प्रवाह कर रहे हैं आप अपने आप को स्वच और खाली कर रहे हैं सांस लेते रहें अब धीरे से अपने आप को एक गहरी और मंद सांस लेकर आराम दे फिर अपने सर के ऊपर से रीड की हडी की जड़ तक सांस ले और रीड की हडी की जड़ से सर के ऊपर तक सांस छोड़े अब अपने सीधे हाथ को अपने दिल के बीच रखें अपने सीधे हाथ के ऊपर उल्टा हाथ रखें अपने फेफ़डों पर अपना पूरा ध्यान केंट्रित करें आपके फेफ़डों को आपकी सांस लेने का एहसास न हो अपनी सांस की गदी को कोमल और धीमा रखें अब आप उस शांती की अनभूती करें जो गहरी हुई जली जा रही हैं जैसे जैसे आपके फेफ़डों की गदी धीमी हो रही हैं और सांस सरल बाहर की दुनिया की आवाजें अब आपको छू नहीं रही हैं आप अपने दिल में अपना घर गहराई और शांती से बसा रहे हैं शांती गहरी शांती अब आप अपने दिल के केंटर को शांती से बढ़ा करते करते हुए शांती में तेरने की अनभूधी करें अपने पूरे ध्यान को अपने दिल पे केंद्रित करें धीरे से सांस ले और धड़कन को महसूस करें इस थिदी में आराम करें बहुत गहरी शांती की अनभूधी करें बाहर की दुनिया की आवाजे अब आपकी शांती भंग नहीं कर सकती आप इस दुनिया से मुक्त हैं इस शांती में लीन हो जाये इस शांती में अपने आप को जमा लीजिये ये गहरा माउन ही आपके मोक्ष की गहराई है आपका आनन्द शब्दों में बयान नहीं हो सकता है आप आनन्द में हैं और आप विकसित हो रहे हैं आप इस शांती के द्वारा मूल स्त्रोत से जुड़ रहे हैं आप भी ये मूल स्त्रोत बन रहे हैं आप स्त्रोत और इश्वर में विलीन हो रहे हैं अपने गुरू का चहरा अपने दिल के केंद्र में महसूस करें आपके गुरू पूरे माउन और शांती के साथ आपके दिल में बैठे हैं वे परमानन्त प्रचोरता और सुख की स्थिती में लीन हो जाये अपने गुरू के साथ एकता का अनुभव करें और वैसे ही एकता परम भरमान के साथ अनुभव करें शांती से परम शांती में बस जाये आप अपने गुरू के साथ एक हो रहे हैं आप दोनों के बीच कोई प्रदिबंध नहीं हैं आप दोनों शांती,
परमाननद,
स्वतंत्रता और पवित्र हर्ष में लुप्त हैं आपके भेफ़डे शांत और सौम्य हैं आपके सांस शांत और सौम्य है उस शांती में आप अपने आपको दस मिनिट के लिए स्थाबित करें धीरे धीरे अपना ध्यान अपनी रीट की हड़ी की जड़ पर लाएं सर के उपर के छेद से सांस ले और रीट की हड़ी की जड़ तक ले जाएं और फिर यहां से सर के उपर तक ले जाकर बाहर छोड़ें सांस धीरे धीरे अंदर ले और धीरे धीरे छोड़ें गहराई से सांस अंदर ले और बाहर छोड़ें धीरे धीरे अपना ध्यान अपने आप पर और पूरी बाहरी दुनिया पर वापस लाएं धीरे धीरे अपने शरीर को महसूस की जिये अपने शरीर को महसूस की जिये अपने शरीर को महसूस की जिये अपनी हतेलियों को धीरे से रगडिये और इस उत्पन घर्मी को अपनी आंखों,
अपने छेहरे और शरीर के अन्य भागों पर दीन बार लगाएं जब आप चाहें और आप तैयार हों तब आप धीरे से अपनी आंखें खोलें