अराम से बैट जाएं और बहुत ही अलके से अपनी आँखें बंद कर लें हम पैरों की अंग्लियों से सुरुवाद करते हैं अपने पैरों की अंग्लियों को कुमाएं अब महसूस करें कि धिली और तनावमुत हो रही है एक तरह की सक्ति उर्जा धरती से उपर आ रही हैं हमारे पैरों में एंटर हो रही हैं पंजों से उपर गुटनों की और एवं पैरों को आराम पहुचा रही है अपनी जांगों को धिला छोड़ दें उर्जा गुटनों से उपर की और जा रही है और उन्हें आराम मगन कर रही है अब अपने कुलहे पैट और कमर को एकडम धिला छोड़ दें सोचें कि वहां भी उर्जा जा रही है अपनी पीट को धिला छोड़ दें उपर से नीचे तक आपकी पूरी पीट आराम का अनुभव कर रही है वहां भी सोचें कि वह धरती से आयी हुई उर्जा हमें एक तरह का सिथिल तप्रा हमको सिथिल बनाने जा रही है अपनी चाती और अपने कंदों को धिला छोड़ दें महसूस करें कि आपके कंदे हलके होकर सुखद ऐसास में विलिन हो रहे हैं अपनी उपरी बाहों को धिला छोड़ दें आपकी कोहनी से नीचे हतेली तक की सारी मास पेश्या अंगुलियों को सभी आराम के एहसास में दुपिक हुई हैं गर्दन को भी धिला छोड़ दें अपना द्यान अपने चहरे पर ले जाएं नफेश,
चबड़ा,
मुह,
नाक,
आख,
कान सब माता पे भी सिर के सिकर तक सब धिला छोड़ दें सूच चे की धरती माता से आयी हुई उर्जा हमें रिलाक्स कर रही हैं महसूस करें की अब पूरा सरीर हलका होकर आराम के सुखद एहसास में दुबा हुआ है अब अपना ध्यान रिदे की और ले जाएं सूच चे की मेरे रिदे में इश्वर्य ब्रकास मौजुद है और हमारे ध्यान को उनकी तरह खींच रहा है और मुझ में वो प्राणा हुती आ रही है यदि खायाल आयें तो सिर्फ इतना ही सोचना है कि मैं ध्यान में बैठा हूँ विचानों की तरफ मन न लगाएं सिर्फ अपने को याद करवाना हैं कि मैं ध्यान में बैठा हूँ सूच चे की वो इश्वर्य धारा मेरे रदे में एक सहाई जुरूप से आ रही है