आराम से बेट्ये आपकी पीट और रीट की हड़ी को सीधा रखिये हलके से आंखे बंद कीजिये ध्यान कदम होने तक कृपया आंखे न खोलिये दोनों हात चिनमुद्रा में अपने घुटने पर रखिये चिनमुद्रा के लिए तरजनी अंगूठे से लगाकर बाकी तीनों उंगलियां सीधी खुली रखिये दस बार धीरे धीरे और लंबी सांसे लेजिये सांसों को कही रोखो नहीं आराम से हलके से सांस अंदर लीजिये और बाहर छोड़िये अपनी हर एक सांस पर गौर से ध्यान दीजिये हर सांस को अंदर और बाहर जाते हुए महसूस कीजिये कुछ पल के लिए अपने भीतर की समवेदनाय और अनभो का एहसास कीजिये अपने भीतर जांगते हुए आप अपने आप को आराम दायक आनंदित वशांति प्रत महसूस करेंगे यहां उपस्तित रहने के लिए आप अपने आप को धन्य समचते हैं आप एक शांत,
स्थिर,
अजल और सुन्दर भूमी को देख रहे हो अत्यंद शांत,
यहां की हर्याली,
पंछीयों की चेहक,
खुला आस्मा हलके से बहने वाली,
शांत और ठंडी हवा बड़ी सुभावनी है कितनी सुन्दर और शांत जगे है ये अपनी भीतर की दुनिया भी कुछ एसी ही है आपको लग रहा है कि आप यहां घंटों तक ध्यान कर सकते हैं हम अंदर से एसे ही अत्यंद शांत है इस शांत और सुन्दर भूमी पर ध्यान करते हुए आप परमात्मा की अद्भुद,
शुद्ध और दैवी शक्ति का अनभो कर रहे हैं क्या आप सच में इस पवित्र शक्ति को महसूस कर पा रहे हो आप भीतर से एसे ही पवित्र और दिव्य हो धीरे से अपने माता पिता को याद कीजिये देखिये कि वे अपके सामने खड़े हैं आपको आशीर्वा दे रहे हैं वे खुश हैं और आनन से मुस्क्रा रहे हैं शान्ती से आपको इस दुनिया में लाने के लिए अपने माता पिता को पूरे दिल से धन्यवाद दीजिये अब आप देख रहे हैं आपके सभी गुरू,
शिक्षक तथा आचारियों को सभी मास्टर और धर्म गुरूं को जिनोंने आपके सिंदगी को नई दिशा दिखाई आप देख रहे हैं आपके सभी भगवान जिनकी आप पूजा करते हैं ये सब आपके मन में और आङ्खों के सामने बड़ी सुन्दर्ता और इनायत से आ जा रहे हैं सभी आपको शांती और आनंद से आशिर्वाद दे रहे हैं वे सभी शांत और आनंदित हैं जैसे आप उन्हें देखते हैं पूरे दिल से उनका शुक्रिया आधा किजिये जब ये गुरूं और आपके माता पिता आपके मन से प्रवेश और निकास करते हैं आप उन्हें धन्यदा से देखिये उनके आने जाने से आप बहुत ही शांत और आनंदित महसूस करते हो आप समय लीजिये उनके लिए वक्त रखिये हमें कोई जल्दी नहीं इस सुन्दर अनुभूति के साथ आप खुद को पूर्ण और संतुष्ट अन्भो करते हैं कृबया अपना ध्यान रीड की हड़ी की और केंद्रित कीजिये रीड जो अपने आभा शरीर का केंद्र बिंदु है उसकी और ध्यान वीजिये रीड को केंद्र बना के देखें कि आप उसके चारो और आगे भीचे वा इर्दगिल यानी 360 आउंश में हैं ये जागरुपता हमेशा बनाये रखें ये 360 आउंश के अस्तित्तु में आप पूरी तरह से पूर्ण है इस स्थिधी में शांती से आराम से हरेक चीज और वस्तु जिनों ने इस धर्ती पर आपकी सहायता की जैसे की अभी तक आपने जो अन्मग्रहन किया जो कप्टे पहने जितने घरों ने आपको आश्रय दिया जो पैसे आपके हाथ से कुजरे जो चीजे अपने इस्तमाल करी जिन लोगों ने आपकी अभी तक सेवा की और जो आगे भी करते रहेंगे उन सब के परदी क्रदच्ञदा व्यक्त कीजिए अगर कुछ लोग वो चीजे आपको अभी आतन हो तो भी उनके परदी क्रदच्ञदा व्यक्त कीजिए हमेशा खयाल रहें कि आप उनके बिना अधूरे हैं इस पृत्वितल पर आपकी जिन्दगी उनके बिना मुम्किन नहीं थी धीरे धीरे हलके से अपना ध्यान माथे पे केंद्रित कीजिए अपने दोनों आंकों के ऊपर बोहों के बीच में अपना ध्यान केंद्रित कीजिए किसी भी तरह की जबरदस्ती न करें बार बार दोहराने पर आप यह कर पाएंगे धीरे धीरे कोशिश करते रहें जब भी मन में विचार उठेंगे उन्हें बस देखते रहें उन विचारों पे विचार न करें बस उन्हें आते जाते देखते रहें यह विचार न आपके है न आप से कोई संबंत रखते हैं आप इन विचारों के बस साक्षी हैं धीरे धीरे अपना दाहिना हाथ कोहनी में मोड कर अपने सीने के पास रखें हतेली सामने रखते हुए अपना हाथ आशीरवात की स्थिधी में रखें बाया हाथ चिन मुद्रा में था वैसे ही रखना अपनी सांस पर ध्यान दिजिये मैसूस कीजिये की हर सांस के साथ एक दिव्य शक्ती या एनरजी आपके अंदर बह रही है ये शक्ती अंदर बैते हुए दाए हाथ से नियमित रूप से एक धारा की तरह आपके हतेली के बाहर भी आ रही है ये शक्ती निरंतर वा अनंत है हर सांस के साथ अथिक से अधिक मात्रा में शक्ती अंदर आ रही है शरीर की हर बेशी या कोशिका इस शक्ती का सुहावना स्पंधन अनुभव करती है आप भी इस परमात्मा की शक्ती से अधिक से अधिक प्रभारित हो रहे है जब आप इस शक्ती का शरीर में बहते हुए अपने हतेली से बाहर आना अनुभव करते हो तब दिल की गहराई से प्रार्धना कीजिए हमारे अंदर और बाहर शांती बने रहे हमारे अंदर और बाहर आनंत का विखास हो हमारे मन में सब के प्रती प्यार है और सब ही हमें प्यार करते है हम सब को प्यार देते हैं डर और नफरत से हमें कोई फरक नहीं परता है हर संकट और कटिन समय में हम प्यार ही देंगे हमारी दुनिया बस प्यार से ही भरी हुई है हमें पता है कि हम एक पवित्र आत्मा है और हमें कोई दुश्मन नहीं है एक पवित्र आत्मा और इस निराकार का अंच रहने के नाते हम सभी को आशीर्वात देते हैं हम सभी को बिना शर्त प्यार,
आनंद और शांती का आशीर्वात देते हैं इस प्रार्थना के साथ महसूस कीजिए कि परमात्मा की परम सफेद रोशनी आपर अंदर और बाहर अपरमपार बोचार कर रही है इस रोशनी ने आपको चारो और से पूरी तरह से घेर लिया है अब अपने सभी गुरु और आचारियों के चहरे अपने सामने लाईए जैसे गुरु आपके सामने आते हैं,
वे आपका आशीर्वात पाने के लिए आपके सामने कुछ पल रुकते हैं अपने दाएने हाद से बहने वाली शक्ति को अनुभो कीजिये और उन्हें दिल खोल कर आशीर्वात दीजिये उन्हें असीम धन्यदा और अंगिनत प्यार से आशीर्वात दीजिये ऐसे ही अपने परिवार के प्रत्येक सदस्यों को अपने सभी संबंदी और भाई बहनों को जो जो आपको याद आते हैं उन्हें अपने सामने लाईए और पूरे दिल से आशीर्वात दीजिये आपके सभी सहयोगी मित्र जिने आप चाहते हैं या नहीं चाहते हैं और वो सभी जिनके प्रदी आपको द्वेश है उन हर एक को आशीर्वात दीजिये अनुभो कीजिये कि अपना प्यार और अपने हाथ से निकलने वाली इस भवित्र चिरकालीन नित्य वजिवंत शक्ती आपके सामने आने वाले हर एक विक्ति को शांति प्यार और आनंद का अनुभव दे रही है ये भली बांती जान लोकी आपको कोई दुश्मन नहीं ना आप किसी से शत्रुदा रखते हैं जो भी आपके जीवन में आए आपको अच्छे या बुरे अनुभव देने के लिए ही आए और अनुभव दे कर चले गए उन सब का शुक्रिया आधा किजिए उने आशिर्वाद दीजिए सब को आशिर्वाद दीजिए जब ये सब लोग आए और चले गए अपने आपको देखिए खुद पर गौर कीजिए आप भी कितने अच्छे और संतोष प्रति लग रहे हो पवित्र सफेद रोशनी में चमक रहे हो परमात्मा का पूरा पूरा आनन्द उठा रहे हो आप आनन्द से मुस्कुरा रहे हो और खुद को शांत अनुभव करते हो आप पहले से यादा खुद को प्यार कर रहे हो खुद ही को बिना शर्त प्यार का आशिर्वाद दीजिए निस्संदेह प्यार बाड़ने और व्यक्त करने का आशिर्वाद दीजिए आप किसी को भी अपने विचार शब्द या कार्य से कभी दुख दर्ध या नुखसान नहीं पहुचाओगे खुद को आशिर्वाद दीजिए कि आपके मन में कभी उदासीनता के विचार या निराश भावनाएं नहीं आयेंगी अगर आपके मन में बीते हुए दिनों की या अतीत काल से कोई उदास विचार थे तो वे इस ध्यान से पूरे निकल गए हैं आप खुद पवित्र शुद्ध परमात्मा के एक अंच है इस कारण आज के बाद आप किसी भी तनाव को महसूस नहीं करेंगे आप खुद को हमेशा 360 अंच में अनभव करोगे आप खुद को हमेशा पवित्र प्यार का अवतार सम्चोगे आज आपने खुद को पूरी तरह से पवित्र वशुद्ध किया है धीरे से अपना दाहिना हाथ गुढने पर ले आये और चिन मुद्रा में रखिये अगले पांच मिनित तक अपने नए पन में शांती और शुद्धदा का अनभव कीजिये पूरी तरह से अपने आत्मा के साथ रहिये अपने मन और बुद्धी को इधर उधर भटकने न दीजिये अपने हुदई सांस और पूरे शरीर में प्यार शांती आनन्द वधन्यता का एहसास कीजिये बस शांती और आनन्द शांती और आनन्द शांती और आनन्द धीरे से लंभी सांस लीजिये प्रसनता से मुस्कुराते हुए जब आप चाहे तब धीरे से आँखे गोलिए बिलकुल जब आप चाहे तब